राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों के अटेंडर के बैठने के लिए स्टूल तक नहीं गंदे और दागदार बेडशीट से मरीज कैसे होंगे ठीक , मंत्री जी ! एक नजर तो डालिए बदहाल व्यवस्था पर

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 10 जुलाई 2025
रायपुर राजधानी के सेंटर में स्थिति भीमराव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल, रायपुर छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य देखभाल सुविधा है। शहर के केंद्र में और रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से एक किलोमीटर के भीतर स्थित, डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल को आमतौर पर मेकाहारा के रूप में (मेडिकल कॉलेज) जाना जाता है।
इस अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि भर्ती मरीजों को परिजन के द्वारा खुद से व्हील चेयर पर वार्ड तक ले जाना पड़ता है । मरीजों के अटेंडर के बैठने तक के लिए अस्पताल के पास पर्याप्त स्टूल तक नहीं है । वार्ड नंबर 08 ,वार्ड नंबर 26 में खड़े खड़े परिजन या अटेंडर बेहाल हो रहे हैं। कल ही एक भर्ती मरीज के परिजन ने बेडशीट के गंदे होने पर अस्पताल के स्टॉफ से बात की तो उन्होंने बताया कि लॉन्ड्री वाला इसी तरह से साफ करके देता है। मरीजों को मिलने वाले बेडशीट पर एक नहीं कई दाग धब्बे दिख जाएंगे। लॉन्ड्री वाले ने बताया कि मशीन खराब है। बाथरूम के पास की साफ सफाई अभी ठीक नहीं है । परिजन की पैथोलॉजी लैब कई कई घंटे बाद रिपोर्ट देते हैं। इसे भी ठीक किए जाने की जरूरत है। इस अस्पताल में भर्ती कई परिजनों से बात करने पर उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की है।

एक नजर तो डालिए मंत्री जी अस्पताल पर –

अभी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसी स्थिति में अस्पताल केवल सरकारी होने के चलते मरीजों को उनके बेहतर इलाज के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। इस अस्पताल के डॉक्टर्स ने कई ऐसी सर्जरी की हैं जिनकी मिसाल दी जाती है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को समय निकालकर इस समय अस्पताल का अवश्य ही स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। मरीजों से बात करके उनसे पूछना चाहिए कि उन्हें खुद किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भर्ती मरीजों को अस्पताल गाउन तक नहीं दे रहा है। यहां भर्ती होने पर आपको यह एहसास कराया जाता है कि आप सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। जबकि इस देश में एम्स जैसी सरकारी चिकित्सा संस्थान ए ग्रेड की विश्वस्तरीय चिकित्सा प्रदान कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ का यह सबसे बड़े अस्पताल भले ही एम्स न बने लेकिन मरीजों को यह भी नहीं लगे कि केवल सरकारी होने के चलते उन्हें दोहरे दर्जे का इलाज मिल रहा है। इस मानसिकता से मरीज और उनके परिजन को निकालने की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सरकार और अस्पताल प्रबंधन की है।
भर्ती मरीजों से फीड बैक आवश्यक किया जाए ,कई परिजन एक मरीज के साथ आ जाते हैं –
यहां पर भर्ती मरीजों के परिजन से अस्पताल प्रबंधन को उनसे इलाज और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के विषय में फीड बैक लिया जाना आवश्यक किया जाए,जिससे साफ सफाई ,भोजन, इलाज एवं अस्पताल के कर्मचारियों के मरीजों के साथ बर्ताव का आंकलन हो सके। वार्ड में मरीजों के अनधिकृत और गैर जरूरी प्रवेश को नियमों के तहत नियंत्रित किया जाए ।एक ही मरीज के पीछे कई कई परिजन के होने से अनावश्यक भीड़ लगने को रोकना चाहिए।