ई–एटेंडेंस के मामले में फिर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट शासन को नोटिस जारी 22 जनवरी को डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत होगी बहस

जबलपुर प्रवक्ता.कॉम 12 जनवरी 2026
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता मामला पुनः हाईकोर्ट पहुंचा है। कुछ नए मुद्दों के साथ एक बार फिर से याचिका दायर की गई है। मामले पर सुनवाई के बाद जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को निर्धारित की है। दरअसल यह मामला सतना निवासी सत्येंद्र सिंह तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह पैरवी कर रहे है। दायर मामले में कहा गया है कि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट प्रारंभिक
जवाब पेश करने के निर्देश , अगली सुनवाई 22 को
2023 में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी एप को निजी फोन पर डाउनलोड कराने से पहले डाटा मालिक की अनुमति एवं सुरक्षा आवश्यक है। वर्तमान में लगातार साईबर फ्रॉड हो रहें हैं। कई शिक्षक इसके शिकार हो चुके हैं। विभाग को ई-अटेंडेंस के लिए बायोमेट्रिक मशीन लगाकर उपस्थित दर्ज कराना चाहिए ताकि शिक्षकों की आर्थिक व मानसिक सुरक्षा कायम रहे। मामले में दलील दी गई कि मध्यप्रदेश के सभी विद्यालयों में नेटवर्क कनेक्टिविटी भी नहीं है। कई शिक्षकों के पास एंड्राइड फोन भी नही हैं। यह भी कहा गया कि ई-अटेंडेंस नहीं लगाने के कारण कई शिक्षकों का वेतन भी रोक दिया गया है।
क्या है डेटा प्रोटेक्शन एक्ट –
डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act), 2023, भारत में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए एक कानून है, जो व्यक्तियों को उनके डेटा पर नियंत्रण देता है, डेटा इकट्ठा करने वाली कंपनियों (डेटा फिड्यूशियरीज़) के लिए नियम तय करता है, और डेटा के दुरुपयोग पर भारी जुर्माना लगाता है, जिसमें सहमति, पारदर्शिता और डेटा कम से कम इकट्ठा करने जैसे सिद्धांत शामिल हैं
। यह कानून डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को नियंत्रित करता है और भारत के नागरिकों को अपने डेटा के संबंध में जानकारी, सुधार और विलोपन जैसे अधिकार प्रदान करता है





