218 करोड़ के बेहिसाब व्यय प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने दो शाखा लिपिक को किया निलंबित

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 31 जनवरी 2026
कबीरधाम जिले के विकास खंड कवर्धा में 218 करोड़ सरकारी पैसे को बिना रिकॉर्ड मेंटेन किए व्यय किए जाने के प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम ने कार्यवाही करते हुए दो शाखा लिपिकों को निलंबित कर दिया है।
जिला शिक्षा अधिकारीय कार्यवाही अपेक्षित थी लेकिन इस मामले में तात्कालिक प्रभारी बी ई ओ संजय जायसवाल के प्रति नरमी समझ से परे है। उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही हुई यह सभी जानना चाहते हैं । इतनी बड़ी शासकीय राशि के व्यय करने में वित्तीय अनुशासन और नियमों का पालन करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कार्यालय प्रमुख की होती है। उन्होंने बिना नोटशीट में लिए शिक्षकों के एरियर ,अवकाश सहित अन्य प्रकरणों को स्वीकृत ही क्यों किया ?
अगर बाबुओं ने इनकार किया या रिकॉर्ड संधारित नहीं किए तब भी उनको वित्तीय व्यय बिना अभिलेख संधारित हुए नहीं करना था।
जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम तात्कालिक और वर्तमान के संज्ञान में जब यह प्रकरण आया तब भी उन्होंने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की।
जांच टीम ने टिप्पणी में जब यह पाया कि रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हैं और किसी भी प्रकार के बिल वाउचर नहीं उपलब्ध कराया गया है तब उनको बी ईओ के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित करना चाहिए था। क्या और भी प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी इसी प्रकार की उदारता बरतते हैं यह गौरतलब है।
ईओडब्ल्यू में शिकायत–
बीईओ कार्यालय में हुई इस अनियमितता / गड़बड़ी में कितनी राशि को बेहिसाब तरीके से खर्च किया गया है। इसका पता लगाने के लिए आर टी आई कार्यकर्ता लोक आयोग और ईओडब्ल्यू का रुख कर सकते हैं। प्रभारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध स्कूल की मान्यता के प्रकरण में नियमों की अनदेखी, बी आर सी कबीरधाम के द्वारा 15 प्रतिशत की कमीशन मांगे जाने के संबंध में लिखित शिकायत पर अभी भी कार्यवाही उच्च कार्यालय में पेंडिंग है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि 218 करोड़ प्रकरण में अवकाश स्वीकृत करने में अनियमितता ,गलत भुगतान ,बिल की अनुपलब्धता क्यों नहीं है जैसे बिंदुओं पर जांच निष्पक्ष एजेंसी के माध्यम से हो जाना चाहिए।
बाबुओं के निलंबन आदेश में क्या है जानें –
माया कसार के निलंबन का कारण –

जिला शिक्षा अधिकारी के ज्ञाप.क्र. / 753 / शिकायत / निलंबन / 2025-26 कबीरधाम, दिनांक 30.01.2026 के अनुसार
श्रीमती माया कसार, सहायक ग्रेड-02, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कचहरी पारा, कवर्धा, वि.ख- कवर्धा, जिला कबीरधाम के संबंध में निम्न आरोप अधिरोपित किये जाते है-
जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम द्वारा गठित ऑडिट दल द्वारा विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय कवर्धा का ऑडिट कराया गया। उक्त ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार माह फरवरी-2024 से जून-2025 तक श्रीमती माया कसार, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कवर्धा में सहायक ग्रेड-02 के पद पर पदस्थ रहे एवं वित्त शाखा का प्रभार भी उनके पास था। उक्त अवधि में उनके द्वारा कैशबुक लिखा नहीं गया है, आय-व्यय का किसी भी प्रकार का लेखा संधारण नही किया गया है।
उनका उक्त कृत्य कर्तव्य के प्रति उदासीनता, गंभीर लापरवाही एवं स्वच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है जो कि छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 की धारा-3 का परिपंथी है। अतः अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए छ.ग. वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 क भाग 4 की धारा 9-1 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्रीमती माया कसार, सहायक ग्रेड-02, को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान उनका अस्थायी मुख्यालय कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी स.लोहारा नियत किया जाता है तथा निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। का लेख किया गया है।
योगेंद्र कश्यप के निलंबन में दिए गए कारण

डी ईओ के आदेश के अनुसार योगेन्द्र सिहं कश्यप, सहायक ग्रेड-02 कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, स. लोहारा, वि.ख- स.लोहारा जिला कबीरधाम के संबंध में निम्न आरोप अधिरोपित किये जाते है-
कुंभकरण कौशिक, प्रधान पाठक, शास.प्राथ.शाला लिमो, विकास खण्ड कवर्धा, जिला कबीरधाग के द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति वेयक की राशि अप्राप्त होने एवं संबंधित फाईल के गायब होने से संबंधित शिकायत की जाँच, जाँच दल गठित कर करवायी गयी। जाँच दल ने उनको प्राथमिक उत्तरदायी स्थिर किया है।
जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम द्वारा गठित ऑडिट दल द्वारा विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय कवर्धा का ऑडिट कराया गया। उक्त ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार माह फरवरी-2023 से जनवरी-2024 तक श्री योगेन्द्र सिंह कश्यप, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कवर्धा में सहायक ग्रेड-02 के पद पर पदस्थ रहे एवं वित्त शाखा का प्रभार नी उनके पास था। उक्त अवधि में उनके द्वारा कैशबुक लिखा नहीं गया है, आय-व्यय का किसी भी प्रकार का लेखा संधारण नही किया गया है।
उनका उक्त दोनो कृत्य कर्तव्य के प्रति उदासीनता, गंभीर लापरवाही एवं स्वच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है जो कि छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 की धारा-3 का परिपंथी है। अतः अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए छ.ग. वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 क भाग 4 की धारा 9-1 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री योगेन्द्र सिंह कश्यप, सहायक ग्रेड-02. को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान उनका अस्थायी मुख्यालय कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी बोडूला नियत किया जाता है तथा निलंबन अवधि में नियमानुसार जीनन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।:
ये कैसा बी ईओ ऑफिस


कवर्धा बीईओ ऑफिस आखिर तीन साल तक कैसे चलता रहा , बिल वाउचर और भुगतान रजिस्टर कुछ भी नहीं बनाए गए ।
क्या थी गड़बड़ी ?
ई-कोष के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 में 27 करोड़ 76 लाख 1 हजार 786 रुपए निकाले गए। इसी तरह अप्रैल 2023 से मार्च 2024 में 67 करोड़ 29 लाख 22 हजार 645 रुपए, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 में 73 करोड़ 37 लाख निकले।
41 हजार 69 रुपए और अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 में 49 करोड़ 62 लाख 1 हजार 844 रुपए निकाले गए। इस तरह कुल 2,18,04,87,344 रुपए ट्रेजरी से आहरित हुए, लेकिन यह पैसा कहां गया, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
इस पूरे गड़बड़ी की जड़ में तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल ही दिखाई दे रहे हैं। उन्हीं के कार्यकाल में कैश मुक बंद हुई, रजिस्टर संधारण रुका, ट्रेजरी से अरबों रुपए की निकासी हुई और आज पूरा हिसाब गायब है। अब उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। इस मामले में उनसे मागि गए स्पष्टीकरण का इतजार किया जा रहा है।
है
तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल ने खुद ऑडिट के दौरान इसे स्वीकार किया। 24 नवंबर 2025 में पत्र क्रमांक- 1932 (ए) में उन्होंने लिखा कि जुलाई 2022 से इस कार्यालय में कैश बुक संधारित नहीं है। बिल रजिस्टर भी अपूर्ण है। फिर 25 नवंबर 2025 के पत्र क्रमांक- 1953 में दोबारा माना कि जुलाई 2022 से नियमित वेतन, रुका वेतन, वेतन वृद्धि, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, यात्रा भत्ता, अनाज अग्रिम, त्योहार अग्रिम, सीसी बिल, साभानि कटौती से जुड़े देक्कों और नोटशीट का संधारण ही नहीं हुआ है। यानी वाई से 3 साल तक पूरा ऑफिस बिना किसी लेखा व्यवस्था के चलाया





