मध्यप्रदेश के जंगल कान्हा टाइगर रिजर्व में 100 साल बाद लौटे वन भैंसे: असम से लाए गए 8 जंगली भैंसों को सूपखार क्षेत्र में बड़े बाड़े में छोड़ा गया
राज्य के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में असम से लाए गए 8 जंगली भैंसों को एक बड़े बाड़े में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया है। लगभग एक शताब्दी (100 वर्ष) के लंबे अंतराल के बाद मध्यप्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट हुई है, जिसे वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
विजय सिंह ठाकुर/ भोपाल / मंडला/सुपखार
प्रवक्ता.कॉम 12 अक्टूबर 2026
मध्यप्रदेश के वन्यजीव इतिहास में आज एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। राज्य के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में असम से लाए गए 8 जंगली भैंसों को एक बड़े बाड़े में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया है। लगभग एक शताब्दी (100 वर्ष) के लंबे अंतराल के बाद मध्यप्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट हुई है, जिसे वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

प्राकृतिक इकोसिस्टम को मजबूती देने की पहल
राज्य सरकार और वन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों में लुप्त हो चुकी या घटती वन्यजीव प्रजातियों को पुनः बसाकर प्राकृतिक इकोसिस्टम (Ecosystem) को और अधिक समृद्ध और संतुलित बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी इसी व्यापक वन्यजीव पुनरुद्धार अभियान का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन वन्यजीवों के आने से यहाँ के घास के मैदानों और संपूर्ण खाद्य श्रृंखला (Food Chain) को एक नया प्राकृतिक संतुलन मिलेगा।
असम सरकार और मुख्यमंत्री का जताया आभार

इस चुनौतीपूर्ण और महत्वाकांक्षी वन्यजीव स्थानांतरण अभियान को सफलतापवूर्क अमलीजामा पहनाने में असम सरकार का विशेष सहयोग रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर असम के माननीय मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) का विशेष आभार व्यक्त किया गया है, जिनके सक्रिय सहयोग से असम से इन जंगली भैंसों को सुरक्षित मध्यप्रदेश पहुँचाना संभव हो सका।
क्या कहते हैं वन्यजीव विशेषज्ञ?

कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षणविदों के अनुसार, सूपखार क्षेत्र का वातावरण और यहाँ के घास के मैदान जंगली भैंसों के प्राकृतिक रहन-सहन के अनुकूल हैं। वर्तमान में इन्हें एहतियात के तौर पर एक बड़े बाड़े में रखा गया है, जहाँ वन विभाग के पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी सेहत और गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है। कुछ समय बाद अनुकूल स्थिति होने पर इन्हें पूरी तरह से खुले जंगल में विचरने के लिए छोड़ा जाएगा।
इस अभूतपूर्व पहल से एक बार फिर मध्यप्रदेश के जंगलों में सदियों पुरानी प्राकृतिक रौनक लौटने की उम्मीद जग गई है, जिससे देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है।






