टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बड़ी रैली का हुआ आयोजन टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खत्म करने लिए कानून बनाए
टीईटी अनिवार्यता के विरुद्ध ऐतिहासिक आंदोलन का साक्षी बना दिल्ली का रामलीला
दिल्ली प्रवक्ता. कॉम 04 अप्रैल 2026
आज दिल्ली में देश भर से आए शिक्षकों ने रामलीला मैदान को अपनी उपस्थिति से भर दिया ।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने टीईटी के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 1 सितंबर 2025 को दिए गए इस निर्णय से असहमति जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया जिसके अंतर्गत प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को दो साल के भीतर पास करने को कहा है।
टीएफआई का तर्क –
आज जो बड़ा आंदोलन हुआ उसमें टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने साफ साफ अपने मंच के पीछे लगे बैनर के माध्यम से अपनी मांग को रखा जिसके अनुसार बड़े बड़े अक्षर में लिखा था ।
NO TET BEFORE RTE

इसका मतलब यह है कि देश में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के लागू पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह अधिनियम किस प्रकार से बंधन कारी हो सकता है। वैसे भी इस देश की अलग अलग न्यायालयों के द्वारा पारित निर्णय के आधार पर ही इस आदेश के आधार पर ही विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। इस समय सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों के द्वारा ही 1000 से अधिक पुनर्विचार अपील याचिका लगाए गए हैं । जिसकी सुनवाई कोर्ट को करनी है।
शिक्षकों को टीईटी से राहत के विकल्प क्या हो सकते हैं–
इस समय देश भर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध शिक्षकों ने अपनी आपत्ति जाहिर की है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, जम्मू कश्मीर , पश्चिम बंगाल,पंजाब, मेघालय, तेलंगाना की राज्य सरकारों ने ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार अपील याचिका लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट में इन सर्विस शिक्षकों के अलग अलग संगठनों जिनमें से राज्य शिक्षक संघ मध्यप्रदेश,अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ (AIPTF), उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, झारखंड आल प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (AJPTA), कर्नाटक राज्य कर्मचारी संघ (KSGTA), त्रिपुरा गवर्नमेंट टीचर्स एसोसिएशन( TGTA) जैसी शिक्षक संगठनों ने भी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई है।
कानूनी विकल्प ·
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश पारित किया है उसका आधार आरटीई एक्ट पारित (लाया गया): शिक्षा का अधिकार कानून संसद द्वारा 4 अगस्त 2009 को पारित किया गया था। लागू: यह कानून 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हुआ। इसी अधिनियम
शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 23 में शिक्षकों के लिए ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (Teacher Eligibility Test – TET) का प्रावधान किया गया है।
अब जब तक संसद द्वारा इस अधिनियम में संशोधन सरकार द्वारा नहीं कर दिया जाता तब तक शिक्षकों को राहत नहीं मिलेगी । लेकिन सरकार की तरफ से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षकों के संगठनों को इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
दूसरा विकल्प यह है कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्वयं अपने निर्णय के बाद उत्पन्न परिस्थितियों के चलते सरकार को ऐसा निर्देश जारी करे जिसके आधार पर 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट के लिए अधिनियम में बदलाव किया जाए।
इसके अतिरिक्त कई ऐसे विकल्प हो सकते हैं जिनमें 10 साल से अधिक की अवधि तक अध्यापन का अनुभव को टीईटी के समकक्ष मान्य किया जाए।
टीएफआई प्रेसिडेंट ने आज कहा
के बैनर तले देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लाखों शिक्षकों ने रामलीला मैदान दिल्ली पहुँच कर बता दिया कि शिक्षकों के साथ अन्याय को बर्दास्त नहीं किया जायेगा ।रैली में उपस्थित सभी शिक्षकों ने साफ़ कहा कि भर्ती के समय सरकार द्वारा जो भी नियम और योग्यता निर्धारित की उसे अर्जित करने के बाद ही सभी शिक्षक नियुक्ति पाये है ।सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता थोपा जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा ।शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति सरकार द्वारा की गई इसलिए उसकी सेवा शर्तों की सुरक्षा का दायित्व भी सरकार का है ।फेडरेशन ने माँग की कि भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के retrospective effect को समाप्त करने के लिये क़ानून बनाए ।

रैली के मुख्य अतिथि मा सांसद जगदंबिका पाल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा हम देश के शिक्षकों की आबाज को देश यशस्वी प्रधानमंत्री जी तक पहुँचाएँगे और शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जायेगा ।
हम देश भर से आये सभी साथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ।
छत्तीसगढ़ से हज़ारों शिक्षकों ने आंदोलन में किया भाग
आंदोलन में छत्तीसगढ़ प्रदेश से टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन, मनीष मिश्रा तथा प्रांत अध्यक्ष रविंद्र राठौर के नेतृत्व में हजारों की संख्या शिक्षक शामिल हो रहे हैं।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार ने बताया कि यह आंदोलन टीईटी के अनिवार्यता को रद्द करने, काला कानून वापस लेने तथा शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे खतरे को खत्म करने के लिए हो रहा है।




