प्रवक्ता.कॉम दिनांक मुंबई 4अप्रैल 2025
लोकसभा राज्य सभा में पारित हुआ वक़्फ़ संशोधन अधिनियम, पारदर्शिता की ओर बढ़ता कदम: अभाविप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लोकसभा में पारित किए गए वक्फ संशोधन विधेयक का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करती है। यह विधेयक वक्फ से जुड़े कई विवादों को समाप्त करने में सहायक होगा तथा वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिमों और महिलाओं को शामिल किए जाने से इसे अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं प्रामाणिक बनाया जा सकेगा। वक्फ संपत्तियों के ऑडिट और पंजीकरण को अनिवार्य करने तथा सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा हेतु किए गए प्रावधान भी सराहनीय हैं, जिससे इस कानून को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।

वक्फ संशोधन विधेयक के तहत वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए छह महीने के भीतर उनका ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिससे सरकार को उनकी ऑडिट और निगरानी का अधिकार मिलेगा तथा कानून के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों और महिलाओं को शामिल किए जाने से विविधता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। प्रस्तुत विधेयक में केवल दान में प्राप्त संपत्तियों को ही वक्फ संपत्ति माना जाएगा और बिना दस्तावेज एवं सर्वेक्षण के किसी संपत्ति पर वक्फ का दावा नहीं किया जा सकेगा। अभाविप आशा करती है कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप, वक़्फ़ संशोधन कानून सर्वसमावेशी, न्यायसंगत एवं वक़्फ़ प्रबंधन में पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, सरकारी संपत्तियों पर वक्फ के दावे की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराई जाएगी और यदि दावा गलत पाया जाता है, तो वह संपत्ति राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज कर दी जाएगी, जिसे विवाद की स्थिति में प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस विधेयक में वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को हाईकोर्ट तक चुनौती देने की अनुमति दी गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और व्यक्तिगत अधिकारों को बल मिलेगा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा,”वक्फ संशोधन विधेयक भारत के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। वर्तमान वक्फ कानून को लेकर विभिन्न विवाद एवं चुनौतियाँ सामने आती रही हैं, जिन्हें इस विधेयक के माध्यम से निश्चित रूप से हल किया जा सकेगा। वक्फ काउंसिल में महिलाओं एवं गैर-मुस्लिमों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय इसे और अधिक निष्पक्ष और संतुलित बनाएगा। धर्म के आधार पर भेदभाव न करने का यह प्रयास समानांतर सत्ता की अवधारणा को समाप्त करने वाला कानून है। इसे धर्म और मजहब के विभाजन की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। अभाविप, सरकार द्वारा पारदर्शिता और न्यायिक सुधार की दिशा में उठाए गए इस महत्वपूर्ण कदम की सराहना करती है और इसे भारतीय समाज में समानता एवं समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानती है।”