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लोक शिक्षण संचालनालय ने गैर शैक्षणिक कार्यों में कार्यरत शिक्षकों को रिलीव करने का आदेश किया जारी बार बार आदेश जारी होने के बाद भी ऐसे शिक्षकों पर विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर पाता

विभागीय मंत्री से भी हुई शिकायत 10से 15 साल से जमे हैं नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक , आदेश के पालन नहीं होने से आम शिक्षकों में है नाराजगी


रायपुर प्रवक्ता कॉम 25 फरवरी 2026
राज्य शासन ने फिर से एक बार गैर शैक्षणिक कार्यों में सलंग्न शिक्षकों को स्कूल के लिए कार्यमुक्त करने का आदेश जारी किया है।

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लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़
इन्द्रावती भवन, ब्लॉक 3 प्रथम तल,अटल नगर
क./स्था.4/2026/17 नवा रायपुर, दिनांक 24/2/26 के द्वारा जारी आदेश में समस्त संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग, छत्तीसगढ़ समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, छत्तीसगढ़.को संबोधित करते हुए निर्देशित किया गया है कि गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना हेतु कार्यमुक्त किया जाकर संचनालय को अगवत कराया जाए।


जिला शिक्षा अधिकारी और संभागीय संयुक्त संचालक भी आदेश पर कोई कार्यवाही नहीं करते –

छत्तीसगढ़ में इस तरह के आदेश विभाग क्यों जारी करता है, यह समझ से परे है इस आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी और संभागीय संयुक्त संचालक पर है उनको डीपीआई को यह प्रमाण पत्र भी देना है उनके उनके प्रभार वाले जिलों में कोई भी शिक्षक गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न नहीं है। इस आदेश का पालन करने से पहले ही इनको कई ऐसे फोन कॉल आ जाते हैं होंगे तभी तो बार बार ऐसे आदेश को जारी करने की जरूरत पड़ती है।
कई सालों से सासंद और विधायक कार्यालय में जमे हैं शिक्षक ·

छत्तीसगढ़ के सांसद और विधायक के कार्यालय में जमे कई शिक्षकों को क्या विभाग हटाकर मूल शालाओं में भेज पाएगा ।
सैकड़ों शिक्षक 10साल से अधिक समय तक प्रतिनियुक्ति की आड़ में बी आर सी , ए पी सी , और तहसील कार्यालयों में बाबू गिरी कर रहे हैं । विभागीय मंत्री को भी इसकी शिकायत की गई है कि छत्तीसगढ़ में 10 से 15 साल तक नियम विरुद्ध तरीके से प्रति नियुक्ति पर शिक्षक जमे हुए हैं ।
आदेश के पालन नहीं होने से आम शिक्षकों में रोष – शासन के संलग्नीकरण खत्म करने के आदेश का पूर्णतः पालन नहीं होने से मैदानी और पहाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले शिक्षकों में रोष है कि उनके ही समकक्ष पदों में नियुक्त शिक्षक अफसरी का रौब उन पर ही जमाते हैं जबकि कायदे से उनकी जगह स्कूल है।

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