जनगणना के चलते प्रदेश में ट्रांसफर पर बैन हटने में लगेगा टाइम मई के बाद हो सकेंगे स्थानांतरण

भोपाल प्रवक्ता.कॉम 2 अप्रैल 2026
प्रदेश में ट्रांसफर से बैन हटने का इंतजार कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों को इस बार थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ेगा। इस साल मई के बाद ही ट्रांसफर से बैन हटने के आसार हैं। इसकी वजह है जनगणना का बड़ा काम है, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। दरअसल, मप्र में जनगणना का पहला चरण 16 अप्रैल से शुरू होगा। इसी दिन से मप्र में जनगणना निदेशालय की ओर से तैयार सेल्फ एन्युमरेशन मप्र की विंडो खुलेगी। आम लोग 16 से 30 अप्रैल तक स्व-गणना सुविधा का लाभ उठाते हुए खुद ही अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद मप्र के लिए सेल्फ एन्युमरेशन विंडो बंद हो जाएगी। फिर 1 मई से डोर-टू-डोर सर्वे शुरू हो जाएगा, जिसमें मकान, दुकान और
हर जिले में 15 से 20 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना के कार्य में लगेगी प्रदेश में कुल 1.90 लाख कर्मचारी फील्ड में उतरेंगे
मप्र में जनगणना की कार्ययोजना
पहला चरण (2026 में)
स्व-गणना अवधि हाउस लिस्टिंग शामिल जानकारी जनसंख्या गणना संदर्भ तिथि-शामिल जानकारी 16 अप्रैल 30 अप्रैल 1 मई – 30 मई मकान, सुविधाएं, संपत्तियां
दूसरा चरण (2027 में) फरवरी-मार्च
1 मार्च 2027 जनसंख्या, जाति, शिक्षा, आर्थिक स्थितिभवनों की गिनती होगी। डोर-टू-डोर सर्वे 30 मई तक चलेगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेश में मकान-दुकान और भवनों की गणना के लिए 1 मई से 1.90 लाख कर्मचारी फील्ड में उतरेंगे। मप्र के जनगणना कार्य निदेशालय ने प्रदेश में पहले चरण की जनगणना के लिए 1 लाख 60 हजार प्रगणक और 30 हजार पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। चूंकि मकान-दुकान और भवनों की गणना का काम 30 मई तक चलेगा, इसलिए इस अवधि में किसी भी सूरत में ट्रांसफर से बैन हटने के आसार नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि हर जिले में 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगाई गई है। ऐसे में यदि 30 मई से पूर्व तबादलों से बैन हटाया जाता है, तो जनगणना का काम प्रभावित हो सकता है। एक जिले से दूसरे जिले में कर्मचारियों के स्थानांतरण से डेटा संग्रहण में विसंगति और देरी की संभावना बढ़ जाती है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना का कार्य पूरी तरह टाइम-बाउंड है और केंद्र सरकार इसकी लगातार मॉनिटरिंग करती है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी की जवाबदेही सीधे राज्य सरकार की रहेगी। यही कारण है कि राज्य सरकार जनगणना कार्य के दौरान कर्मचारियों के ट्रांसफर से बैन हटाकर कोई जोखिम लेना चाहेगी।
24 अप्रैल तक है प्रगणकों की ट्रेनिंग की डेडलाइन
प्रदेश में लगभग 140 मास्टर ट्रेनर फील्ड ट्रेनर्स के प्रशिक्षण की प्रक्रिया चल रही है, 24 मार्च से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण 4 अप्रैल तक चलेगा। इसके बाद फील्ड में सर्वे शुरू होने से एक सप्ताह पहले प्रगणकों की ट्रेनिंग होगी, जिसे 24 अप्रैल तक पूरी करने की डेडलाइन है। एक मई से प्रगणक स्मार्टफोन आधारित मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। एक प्रगणक के जिम्मे औसतन 200 मकानों की गणना का जिम्मा होगा। औसतन इतने ही मकानों का ब्लॉक बनाया जाएगा। भवनों की गणना शहरी और ग्रामीण दो ही कैटेगरी में की जाएगी। प्रदेश में शहरी और ग्रामीण दोनों मिलाकर लगभग से 3 करोड़ भवन (हाउसहोल्ड) होने का अनुमान है।
पिछले साल एक मई से हटाया गया था बैन
मप्र सरकार ने पिछले साल नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू की थी। इसके अनुसार एक मई से 30 मई, 2025 तक के लिए कर्मचारियों के ट्रांसफर से बैन हटाया गया था। बाद में मंत्रियो की मांग पर इसकी अवधि 17 जून तक बढ़ा दी गई थी। इस दरमियान करीब 50 हजार कर्मचारियों के तबादले किए गए थे।





