सबको माफ करते हुए सबसे माफी मांगते हुए जाओ हरीश ऐसी मार्मिक विदाई पर तो पत्थर भी रो पड़ेंगे भगवान किसी के साथ ऐसा न करे

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 15 मार्च 2026
हे राम! शब्द के साथ ही इस खबर को भारी मन से लिखना पड़ रहा है भारी मन से आज दुनिया ने हरीश राणा की अंतिम विदाई की जो तस्वीरें देखी सुनी और पढ़ीं वैसा फिर कभी लिखने पढ़ने और सुनने में भी नहीं आना चाहिए।
आज सुप्रीम कोर्ट के अनुमति के बाद 13 वर्षों से एक तरह की बेहोशी में रहने वाले हरीश राणा के ईच्छा मृत्यु की प्रक्रिया की जा रही है । गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा के लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम को दिल्ली एम्स के अनुभवी विशेषज्ञों की निगरानी में हटाया कि प्रक्रिया शुरू हो गई है ।
साभार हिंदुस्तान
ब्रह्मकुमारी ने उन्हें यह कहते हुए अंतिम विदा दी –

इस प्रक्रिया के दौरान ऐसा भी हुआ कि दिल्ली एम्स जाने के पहले प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी की बहन लवली दीदी ने
“सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है।”
इन्हीं शब्दों के साथ ब्रह्मकुमारी केंद्र की बहन कुमारी लवली दीदी ने हरीश राणा को अंतिम विदाई दी।
गाजियाबाद के साहिबाबाद में रहने वाले हरीश राणा को श्रद्धांजलि देने के लिए 13 मार्च को मोहन नगर स्थित ब्रह्मकुमारी केंद्र, प्रभु मिलन भवन से लवली दीदी उनके घर पहुंचीं।
वहां उन्होंने हरीश के माथे पर चंदन का तिलक लगाया और उनकी आत्मा की शांति के लिए मेडिटेशन भी किया।
इसके बाद उन्होंने शांतिपूर्वक उन्हें अंतिम विदाई दी।
हरीश राणा से यह कहे कि हरीश “सबको माफ़ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाओ” उनके यह शब्द पत्थर के भी दिल को चीरने वाला था मैने वीडियो में जो देखा उसे लिख रहा रहा हूं । हरीश राणा ने जिस भाव और दृष्टि से उस समय दीदी की तरफ देखा उससे किसी का हृदय रो पड़ेगा । इस खबर को पढ़ने वालों को भी आज हरीश राणा की आत्मा की शांति और उसके माता पिता के लिए इस असीम पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए भगवान और अपने अपने इष्ट से प्रार्थना करनी चाहिए। यह मांगना चाहिए कि भगवान फिर इसके बाद ऐसी विदाई किसी की भी न हो। प्रवक्ता .कॉम भी उनके दुख में साथ है । शब्दों के माध्यम से उनके माता पिता की तकलीफ को कम नहीं किया जा सकता ऐसा करने में केवल ईश्वर ही इस समय समर्थ हैं।
11 मार्च 2026 को हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी थी
बीते 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने 31 वर्षीय हरीश राणा के लिए जीवनरक्षक उपचार बंद करने की अनुमति दे दी है, जो 2013 में पीजी में चौथी मंजिल से गिरने से लगी गंभीर मस्तिष्क चोट के बाद कोमा में चले गए थे।
काफी दलील सुनने के बाद जस्टिस जेबी परदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने राणा के परिवार द्वारा दायर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की याचिका को स्वीकार कर लिया। जजों ने पाया कि वर्षों के उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था। इसलिए अब इच्छामृत्यु देना ही ठीक रहेगा।
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