कोचिंग संस्थानों पर सरकार की सख्ती 16 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रवेश नहीं देने के निर्देश
शिक्षा मंत्रालय का तर्क छोटे बच्चों को पढ़ाई के प्रेशर आत्महत्या और आग से बचाएगा ! पंजीकरण के वाद ही कोचिंग शुरू हो सकेगी। मौजूदा कोचिंग को तीन महीने में पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। शर्तों के पालन नहीं करने पर होगी कार्यवाही
नई दिल्ली प्रवक्ता.कॉम 16 फरवरी 2026
देश में कोचिंग संस्थान अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अपने यहां प्रवेश नहीं दे सकेंगे। कोचिंग में नामांकन सेकंडरी (10वीं कक्षा) की परीक्षा के वाद ही हो सकेगा। इसके साथ ही कोचिंग में छात्र एक दिन में अधिकतम पांच घंटे ही पढ़ेंगे। यह समय न तो सुबह वहुत जल्दी होगा, न देर शाम या रात में।केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ये दिशा-निर्देश छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों, आग की घटनाओं, सुविधाओं की कमी और उनकी शिक्षण पद्धति के वारे में मिली शिकायतों के वाद जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा, कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षक नहीं रख सकेंगे। वे वच्चों के नामांकन के लिए अभिभावकों को भ्रामक वादे, रैंक या अच्छे अंक की गारंटी नहीं दे सकेंगे। कोचिंग अपनी गुणवत्ता, सुविधाओं या अपने यहां पढ़े छात्रों के परिणाम के बारे में प्रत्यक्ष या परोक्ष दावा भी नहीं सकेंगे। इन नियमों के पालन की प्रणाली के विना संस्थान पंजीकृत नहीं हो सकेंगे। मंत्रालय ने कहा, इसका मकसद कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए कानूनी ढांचे की जरूरत पूरी करना और इनकी बढ़ती संख्या रोकना है। दिशा-निर्देश के मुताविक कोचिंग संस्थान की गतिविधियों की निगरानी के लिए सभी राज्य सरकारें जिम्मेदार होंगी। सक्षम अधिकारी कोचिंग सेंटर की नियमित निगरानी करेंगे। वे कोचिंग केंद्र से पूछताछ भी कर सकेंगे। मांगे जाने पर सालाना रिपोर्ट दिखानी होगी।
कोचिंग संस्थानों के संचालन के सरकार ने तय किए हैं कई मानदंड –
50 से अधिक विद्यार्थी जहां पढ़ेंगे, उसे कोचिंग सेंटर माना जाएगा। इसमें खेल, नृत्य, विएटर, अन्य रचनात्मक गतिविधि शामिल नहीं होंगी। स्कूल की समय अवधि में कोचिंग नहीं लग सकेगी।
छात्रा-शिक्षको को एक दिन का साप्ताहिक अवकाश देना होगा। उसके अगले दिन कोई टेस्ट नहीं होगा। त्योहारों के दौरान अवकाश ऐसे तय हों कि बच्चे परिवार के साथ रह सकें।
पंजीकरण के वाद ही कोचिंग शुरू हो सकेगी। मौजूदा कोचिंग को तीन महीने में पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।
कई बैच होने पर सभी अलग यूनिट होंगी
छात्रों के लिए जरूरी जगह और संसाधन नहीं हैं, तो पंजीकरण नहीं होगा। प्रति छात्र न्यूनतम 1 वर्गमीटर जगह होनी चाहिए।
सभी पंजीकृत छात्रों को नोट्स व पाठ्य सामग्री
बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के देनी होगी। किसी एक कोर्स की फीस लेने के वाद वढ़ाई नहीं जा सकेगी।
कोचिंग में जहां भी जरूरी हो, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
स्कूल की समय अवधि में कोचिंग नहीं लगेगी। ऐसा डमी स्कूलों से बचने के लिए है।
छात्र-शिक्षक का अनुपात सही रखना होगा। इंजीनियरिंग, मेडिकल के अलावा विकल्प बताने होंगे।छात्रों के टेस्ट का परिणाम सार्वजनिक नहीं होंगे।कोचिंग रजिस्टर्ड जगह पर ही चल सकेगी।शर्तों का उल्लंघन करने पर पहली बार 25 हजार रुपए, दूसरी बार 1 लाख जुर्माना लगेगा। तीसरी बार उल्लंघन होने पर पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।छात्र बीच में कोर्स छोड़े, तो बची फीस लौटानी होगीकोचिंग ऐसे शिक्षक या व्यक्ति की सेवा नहीं ले सकते, जो नैतिक कदाचार से जुड़े अपराध का दोषी ठहराया गया हो।अपनी वेवसाइट पर शिक्षकों की योग्यता, पाठ्यक्रम/पाठ्य सामग्री, अवधि, छात्रावास कीसुविधा और फीस का विवरण होगा।तनाव से निपटने के लिए तंत्र बनाना होगा।फीस पारदर्शी और तार्किक हो। हर बच्चे को फीस की रसीद दी जाए। छात्र वीच में कोर्स छोड़े तो वची अवधि की फीस लौटाई जाए।
कोटा में शिकायतों के बाद फीस की हुई वापसी
कोटा-जयपुर में 2.5 लाख छात्रः कोटा जयपुर में 2.5 लाख कोचिंग छात्र हैं। इसमें कोटा में करीव 2 लाख हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट तैयार के अनुसार नीट में 1.01 लाख, वाकी जेईई व अन्य कोर्स के हैं। सरकार के ई-कंप्लेन पोर्टल में इस साल 35 शिकायतें आई, अधिकतर फीस रिफंड की।






