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वॉट्सऐप के जरिए भेजा गया नोटिस वैध नहींः हाईकोर्ट

नोटिस की तामील निर्धारित प्रक्रिया यानि व्यक्तिगत तामील, चस्पा और स्पीड पोस्ट आदि से ही होनी चाहिए। नोटिस का पालन होने पर बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।

प्रवक्ता.कॉम

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जयपुर. हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले वॉट्सऐप पर भेजे गए नोटिस को वैध नहीं मानते हुए एक मामले में नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल वॉट्सऐप से नोटिस सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत वैध नहीं है, उसके आधार पर गिरफ्तारी वैयक्तिक स्वतंत्रता का हनन है। कोर्ट ने अवमानना का दोषी मानते हुए एसीबी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहे आइपीएस अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ को सजा पर सुनवाई के लिए 6 अप्रेल को तलब किया है।

न्यायाधीश प्रवीर भटनागर ने आरएसएलडीसी रिश्वत प्रकरण में रवि मीणा की अवमानना याचिका पर यह आदेश दिया। अधिवक्ता अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने कोर्ट को बताया कि एसीबी ने 25 जनवरी 2023 को वॉट्सऐप के जरिए नोटिस

भेजकर याचिकाकर्ता को 31 जनवरी को तलब किया। इस पर पत्नी की बीमारी के आधार पर समय मांगा, लेकिन एसीबी ने बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए एक फरवरी 2023 को गिरफ्तार कर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा कि एसीबी कार्रवाई सीआरपीसी की धारा 41 ए का उल्लंघन है। इसके जवाब में एसीबी ने कहा कि आरोपी को नोटिस दिया, उसने जवाब में टालमटोल किया। याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन एफआईआर रद्द करवाने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद अनुसंधान एजेंसी पर दबाव बनाने के लिए यह अवमानना याचिका दायर की गई।

कोर्ट ने कहा कि नोटिस की तामील निर्धारित प्रक्रिया यानि व्यक्तिगत तामील, चस्पा और स्पीड पोस्ट आदि से ही होनी चाहिए। नोटिस का पालन होने पर बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।

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