प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर शंकराचार्य होने के मांगे प्रमाण सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस का दिया हवाला भड़के भक्तगण

प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) प्रवक्ता.कॉम 20 जनवरी 2026
संगम नगरी प्रयाग राज में तीन दिन से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद त्रिवेणी संगम में स्नान से रोके जाने और मेला प्रशासन और पुलिस के द्वारा भक्तों और महिलाओं के साथ अभद्रता करने के मामले को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं। इसी बीच मेला आयुक्त ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग दिया है। जिससे विवाद थमने के बजाय और गहरा गया है।
क्या है नोटिस में –

योगी सरकार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से किया इनकार, शिविर के बाहर नोटिस चस्पा
सोमवार देर रात मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इससे पहले शंकराचार्य ने सोमवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- प्रशासन के माफी न मांगने तक हम अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। फुटपाथ पर ही रहेंगे। क्योंकि, शंकराचार्य जब भी इतिहास में स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं। मैं प्रण लेता हूं कि हर मेले के लिए प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं, फुटपाथ पर रहूंगा।
इसके बाद माघ मेला प्रशासन ने स्वामीअविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं हुआ है, इसके बावजूद शिविर के बोर्ड पर खुद को शंकराचार्य प्रदर्शित करना इस आदेश की अवहेलना है।
प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। देर रात नोटिस लेकर पहुंचे कानूनगो को समर्थकों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि सुबह आइए। अभी कोई पदाधिकारी नहीं है जो नोटिस रिसीव कर सके।
क्या हुआ था मौनी अमावस्या के दिन –

इस दिन संगम स्नान करने के लिए अपनी पालकी पर बैठकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने भक्तों सहित जा रहे थे तभी भगदड़ जैसी स्थिति बनी मेला प्रशासन और पुलिस पर भक्तों और महिलाओं से अभद्रता भी करी ऐसा बताया गया है। स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन आयुक्त और पुलिस को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने को कहा साथ उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक ऐसा होता है वो अपनी शिविर में नहीं जाएंगे। इसी विषय को लेकर उनका अनशन जारी है जो सुलझने के बजाय उलझता नजर आ रहा है।
भक्तों में आक्रोश पूछ रहे क्या यही सनातनी परम्परा है –
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोके जाने की घटना ने तुल पकड़ लिया है। आलोचक इस अवसर का खूब राजनैतिक लेते दिखाई पड़ रहे हैं। भक्तों ने इस पूरी घटना को दुर्भाग्यजनक कहा है और इसे शंकराचार्य का अपमान बताया है। सोशल मीडिया में दो तरफा बहस छिड़ी हुई है जो पता नहीं कब जाकर रुकेगी।





