मोदी की गारंटी’ पर उठे सवाल: छत्तीसगढ़ में 86 महीने से अटका DA एरियर, 4.75 लाख कर्मचारियों में आक्रोश
जब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में उसी दल की सरकार केंद्र की तिथि से एरियर दे रही है, तो छत्तीसगढ़ में इसे न देना नीतिगत भेदभाव माना जा रहा है।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 8 सितंबर 2026
रायपुर। विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के तहत शासकीय कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) और समय पर वित्तीय लाभ देने का वादा किया गया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ के लगभग 4.75 लाख (पौने पांच लाख) नियमित कर्मचारियों और पेंशनरों के हाथ निराशा ही लगी है। राज्य में केंद्र की निर्धारित देय तिथि से डीए न मिलने और पिछले 86 महीनों का डीए एरियर बकाया रहने के कारण अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

महीने का बकाया:
कर्मचारियों को भारी आर्थिक चपत
राज्य के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारी संघों का आरोप है कि पिछले 86 महीनों से महंगाई भत्ते की एरियर राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
देय तिथि में देरी:
सरकार जब भी अखिल भारतीय स्तर पर डीए की घोषणा करती है, राज्य सरकारें उसे महीनों बाद लागू करती हैं।
एरियर से दूरी:
घोषणा की तारीख से भुगतान तो शुरू हो जाता है, लेकिन पिछली अवधि के एरियर को दबा दिया जाता है।
आर्थिक नुकसान:
एरियर न मिलने से प्रत्येक कर्मचारी को पदक्रम के अनुसार हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का प्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ रहा है।
| तुलनात्मक बिंदु | मध्य प्रदेश सरकार | छत्तीसगढ़ सरकार |
|---|---|---|
| DA लागू करने की तिथि | केंद्र की देय तिथि (Retroactive Effect) से | राज्य की घोषणा तिथि (Prospective Effect) से |
| लंबित एरियर भुगतान | चरणबद्ध तरीके से एरियर खाते में जमा | 86 महीनों से एरियर की राशि लंबित |
| कर्मचारी संतुष्टि | वित्तीय सुरक्षा और न्याय का अहसास | आर्थिक नुकसान और वादों से वादाखिलाफी का भाव |
सरकार की विश्वसनीयता और कर्मचारियों का भरोसा
छत्तीसगढ़ में ‘मोदी की गारंटी’ के सहारे सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के सामने अब शासकीय कर्मचारियों के भरोसे को बहाल करने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है। चुनाव पूर्व किए गए वादों और धरातल पर क्रियान्वयन के बीच का फासला अब सरकार की विश्वसनीयता पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है।
वादों और धरातल का अंतर: विश्वसनीयता पर संकट
घोषणापत्र पर सवाल: चुनाव के दौरान केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) देने का वादा किया गया था।
86 महीने का वित्तीय अंतर: जनवरी 2017 से अब तक 86 महीनों की एरियर राशि अटकी हुई है। इससे प्रत्येक कर्मचारी को ₹3 लाख से ₹6 लाख तक का नुकसान हुआ है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: एक ही दल की सरकार, फिर भी भेदभाव क्यों?
कर्मचारी संगठनों का सबसे बड़ा सवाल पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की नीतियों को लेकर है। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें एक साथ चुनी गईं, लेकिन कर्मचारियों के प्रति दोनों का रवैया अलग नजर आता है।






