लैंसेट की स्टडी ‘डायफिब-लिवर 2026’ में हुआ खुलासा मधुमेह चुपके से खराब कर रहा है लिवर

विश्व लिवर दिवस
नई दिल्ली, एजेंसी
भारत में मधुमेह के करोड़ों मरीजों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मेडिकल जर्नल लैंसेट की स्टडी ‘डायफिब-लिवर 2026’ के मुताबिक, भारत में टाइप 2 मधुमेह के शिकार हर लोग अनजाने में सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में है।
नए आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ आदतें ही नहीं, बल्कि समय पर जांच की कमी भी भारतीयों के लिवर को खोखला कर रही है। अब तक माना जाता था कि मधुमेह मुख्य रूप से आंखों (रेटिनोपैथी), किडनी (नेफ्रोपैथी) और नसों (न्यूरोपैथी) को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन इस स्टडी ने लिवर की बीमारी (लिवर फाइब्रोसिस) को आधिकारिक तौर पर मधुमेह की चौथी बड़ी जटिलता घोषित कर दिया है। इस सर्वे में भारत के नौ हजार लोगों की जांच की गई। नतीजों ने स्वास्थ्यविशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है।
स्टडी के अनुसार, भारत में मधुमेह वाले 26 फीसदी वयस्क (हर चार में से एक) लिवर फाइब्रोसिस से पीड़ित हैं। इनमें से 14 फीसदी लोग गंभीर स्थिति
किसे है ज्यादा खतरा

जो लोग 10 साल से ज्यादा समय से शुगर के मरीज हैं।
मोटे लोगों में लिवर खराब होने का खतरा दोगुना है।
पतले मरीजों में उम्र बढ़ने के साथ लिवर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
जिन मरीजों में किडनी की कार्यक्षमता कम हो।
रूटीन चेकअप में शामिल हो लिवर स्कैन
विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है, जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लिवर की स्क्रीनिंग को अनिवार्य कर देना चाहिए। जैसे मधुमेह के मरीज हर साल अपनी आंखों और किडनी की जांच करवाते हैं, वैसे ही उन्हें फाइब्रोस्कैन या सीरम बायोमार्कर टेस्ट करवाना चाहिए। लिवर अक्सर तब तक दर्द महसूस नहीं होने देता, जब तक कि वह 70-80 फीसदी खराब न हो जाए। अगर किसी को मधुमेह है तो अपने लिवर की खामोश चीख को नजरअंदाज न करें।
इस खास सर्वे के दौरान भारत के विभिन्न हिस्सों से कुल 9,202 लोगों (ज्यादातर वयस्क) के डाटा की जांच की गई है।जबकि पांच फीसदी लोग संभावित सिरोसिस के करीब पहुंच चुके हैं, फिर भी उनमें बीमारी के कोई बाहरी लक्षण नहीं दिख रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सही आने के बावजूद लिवर के
क्यों खास है स्टडी
लिवर फाइब्रोसिस 26 फीसदी मधुमेह मरीजों में पाया गया है, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति इससे ग्रस्त है
लिवर की जांच के लिए फाइब्रोस्कैन (वीसीटीई) जैसा स्कैन और खून की जांच भरोसेमंद तरीके हैं
अंदर घाव (स्कारिंग) हो सकते हैं। इसे ‘बर्न-आउट’ स्थिति कहा जाता है, जहां लिवर में जमा फैट तो कम हो जाता है लेकिन वह अंदर से पूरी तरह होता है।





