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नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में प्रदेश के तहसीलों में काम बंद, भटक रही जनता विधायक की गिरफ्तारी पर अड़ा कनिष्ठ प्रशासनिक संघ

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 02 जून 2026

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​ छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से शुरू हुआ राजस्व अधिकारियों का आक्रोश पूरे प्रदेश में फैल गया है। सरगुजा जिले के राजापुर (मैनपाट) में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ शासकीय कार्य के दौरान हुई बदसलूकी और मारपीट के विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
​सीतापुर के भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर FIR दर्ज होने के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज प्रदेश के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार 1 जून से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश और कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं। कोरबा जिले में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है, जहां अधिकारी संघ ने कलेक्टर कुणाल दुदावत को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
​क्या था पूरा विवाद?


​यह पूरा विवाद एक कैदी को पेरोल दिलाने के लिए जरूरी ‘साल्वेंसी’ (हैसियत प्रमाण पत्र) जारी करने से जुड़ा बताया जा रहा है।
​27 मई: उप-तहसील राजापुर में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट/नायब तहसीलदार तुषार मानिक शासकीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थक वहां पहुंचे। साल्वेंसी नियमों को लेकर हुए विवाद के बाद नायब तहसीलदार के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट की गई।
​28 मई: पीड़ित अधिकारी की शिकायत पर अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो व अन्य के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज (FIR) किया।
​29 मई: कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने सांकेतिक रूप से एक दिन का सामूहिक अवकाश लेकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया था और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी।
​1 जून: घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से आक्रोशित होकर संघ ने पूरे छत्तीसगढ़ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
​पक्ष-विपक्ष का दावा: जहां एक तरफ नायब तहसीलदार ने सुरक्षा की मांग करते हुए पूरे मामले के लिए विधायक और उनके समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं दूसरी तरफ विधायक का दावा है कि वहां किसी महिला के साथ कथित रूप से किए गए दुर्व्यवहार के कारण जनता में आक्रोश फैला था। विधायक ने खुद जांच में सहयोग करने और नार्को टेस्ट तक कराने की बात कही है।
​तहसीलों में पसरा सन्नाटा, जनता बेहाल
​ प्रदेश की तमाम तहसीलों में इस हड़ताल का सीधा और सबसे बड़ा असर आम नागरिकों, किसानों और छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है।
प्रभावित सेवाएं जनता पर असर
प्रमाण पत्र सेवाएं जून का महीना नए शिक्षण सत्र की शुरुआत का है। कॉलेजों और स्कूलों में एडमिशन के लिए छात्रों को तत्काल आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की जरूरत है, जो ठप पड़े हैं।
जमीन से जुड़े मामले जमीनों की रजिस्ट्री, नामांतरण (fauti/mutation), बंटवारा और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण काम पूरी तरह से रुक गए हैं।
राजस्व न्यायालय तहसील अदालतों में होने वाली सभी प्रकार की सुनवाई बंद हैं, जिससे पक्षकारों को केवल नई तारीखें मिल रही हैं और दूर-दराज से आए लोग परेशान हो रहे हैं।

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