विश्व पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ के शिक्षकों की ‘हरित क्रांति’, कबीरधाम और मुंगेली में लगाए 40 हजार से ज्यादा पौधे

विशेष
कबीरधाम/ पंडरिया/मुंगेली 5 जून 26
कहते हैं शिक्षक सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं देता, बल्कि समाज को जीने की राह भी दिखाता है। इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के कबीरधाम और मुंगेली जिले के सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने। विश्व पर्यावरण दिवस के खास मौके पर इन राष्ट्र निर्माताओं ने अपनी-अपनी टीमों के साथ मिलकर एक ऐसी ‘हरित क्रांति’ की शुरुआत की, जिसने पूरे इलाके की तस्वीर बदल कर रख दी है। अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय इन शिक्षकों ने मिलकर 40 हजार से अधिक पौधों का रोपण कर दोनों जिलों को एक नई हरी-भरी पहचान दी है।
कबीरधाम: सहायक शिक्षक महेश सिंह ठाकुर और ‘हरीतिमा’ का कमाल

कबीरधाम शहर को कंक्रीट के जंगल से बचाने के लिए सहायक शिक्षक महेश सिंह ठाकुर ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी टीम ‘हरीतिमा’ के साथ मिलकर कबीरधाम शहर के कोने-कोने में हजारों छायादार और फलदार पौधे लगाए। महेश सिंह और उनकी टीम का लक्ष्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा करना भी है। आज उनके इस प्रयास से शहर की हवा में एक नया निखार और ठंडक महसूस होने लगी है।
मुंगेली: शिक्षक रामपाल सिंह ने बिखेरी हरियाली की छटा
वहीं दूसरी ओर, मुंगेली जिले में शिक्षक रामपाल सिंह पर्यावरण संरक्षण के सबसे बड़े सारथी बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपनी कर्मठ टीम के साथ मिलकर मुंगेली नगर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया। सड़क के किनारों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक, रामपाल सिंह की टीम ने मुंगेली को हरियाली की चादर से ढक दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिक्षकों के इस जज्बे ने आम जनता को भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया है।
पंडरिया: मोहन सिंह राजपूत की टीम ने लगाए 20,000 से ज्यादा पेड़

इस पूरे महाअभियान में सबसे बड़ा और रिकॉर्डतोड़ योगदान पंडरिया क्षेत्र से देखने को मिला। यहाँ के शिक्षक मोहन सिंह राजपूत और उनकी संस्था ‘पर्यावरण संरक्षण मंडल पंडरिया’ ने अकेले 20,000 से ज्यादा पौधे लगाकर इतिहास रच दिया। उनकी टीम की इस कड़ी मेहनत की बदौलत पंडरिया शहर न सिर्फ बेहद सुंदर नजर आने लगा है, बल्कि आने वाले समय में यहाँ का तापमान भी काफी शीतल रहने की उम्मीद है।
आंकड़े जो बयां कर रहे हैं बदलाव की कहानी
क्षेत्र/जिला नेतृत्वकर्ता शिक्षक टीम/संस्था का नाम मुख्य योगदान
कबीरधाम महेश सिंह ठाकुर (सहायक शिक्षक) हरीतिमा कबीरधाम शहर में हजारों पौधों का रोपण
मुंगेली रामपाल सिंह (शिक्षक) स्थानीय वालंटियर्स मुंगेली नगर को पूरी तरह हरा-भरा बनाना
पंडरिया मोहन सिंह राजपूत (शिक्षक) पर्यावरण संरक्षण मंडल 20,000 से अधिक पौधे लगाकर शहर को सुंदर व शीतल बनाना
“हम सिर्फ बच्चों का भविष्य ही नहीं, बल्कि उस धरती का भविष्य भी संवार रहे हैं जहाँ ये बच्चे सांस लेते हैं। अगर आज हम पेड़ नहीं लगाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी को ऑक्सीजन सिलेंडर के भरोसे जीना पड़ेगा।”
— अभियान से जुड़े शिक्षकों का साझा संदेश
जनता ने सराहा, प्रशासन ने थपथपाई पीठ:
शिक्षकों के इस भागीरथी प्रयास की सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक जमकर तारीफ हो रही है। जिले के आला अधिकारियों और पर्यावरणविदों ने इन शिक्षकों को सैल्यूट किया है। इस पर्यावरण दिवस पर छत्तीसगढ़ के इन गुरुजनों ने साबित कर दिया कि यदि समाज को बदलने की ठान ली जाए, तो एक हाथ में चौक और दूसरे हाथ में खुरपी लेकर धरती को दोबारा स्वर्ग बनाया जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ के जांबाज शिक्षकों की ‘हरित क्रांति’, कबीरधाम और मुंगेली में लगाए 40 हजार से ज्यादा पौधे
1. वन विभाग द्वारा ‘पर्यावरण मित्र’ या ‘वन रक्षक’ पुरस्कार
वन विभाग को जिला और राज्य स्तर पर एक विशेष समारोह आयोजित कर शिक्षक महेश सिंह ठाकुर, रामपाल सिंह और मोहन सिंह राजपूत को सम्मानित करना चाहिए। उन्हें ‘छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न’ या ‘वृक्ष मित्र’ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जाना चाहिए, ताकि अन्य लोगों को भी इसकी प्रेरणा मिले।
2. शिक्षा विभाग द्वारा ‘विशेष कार्य प्रशस्ति पत्र’
शिक्षा विभाग को इन शिक्षकों की इस अनूठी पहल को उनकी सर्विस बुक (Service Book) में दर्ज करना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) या शिक्षक दिवस (5 सितंबर) के मुख्य राजकीय समारोह में मुख्यमंत्री या राज्यपाल के हाथों इन्हें “उत्कृष्ट सामाजिक सेवा सम्मान” दिलाया जाना चाहिए।
3. ‘ग्रीन बजट’ और ट्री-गार्ड्स की सरकारी मदद
सिर्फ सम्मान ही नहीं, बल्कि शासन स्तर पर इनकी संस्थाओं (जैसे ‘हरीतिमा’ और ‘पर्यावरण संरक्षण मंडल’) को सरकारी फंड या ‘ग्रीन बजट’ से आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। वन विभाग की तरफ से इन्हें मुफ्त में ट्री-गार्ड (पौधों की सुरक्षा के लिए जाली) और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि इनका अभियान कभी रुके नहीं।
4. इनके मॉडल को अन्य स्कूलों में लागू करना
शासन को इन शिक्षकों को ‘पर्यावरण ब्रांड एंबेसडर’ बनाना चाहिए। इनके द्वारा किए गए कार्यों को एक केस स्टडी (Case Study) के रूप में प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों में दिखाना चाहिए, ताकि हर स्कूल का स्टाफ और बच्चे अपने आस-पास के क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने के लिए प्रेरित हो सकें।





