टीईटी अनिवार्यता पर संसद में सरकार का बड़ा बयान: शिक्षा समवर्ती सूची का विषय, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दिया स्पष्ट जवाब , अध्यादेश लाने पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई

प्रवक्ता .कॉम दिल्ली: 21 जुलाई 2026
संसद के सत्र के दौरान शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और सेवारत शिक्षकों पर इसके प्रभाव को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। लोकसभा में इ तुकाराम के अतारांकित प्रश्न संख्या 212 के लिखित उत्तर में, शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने बताया कि देश में शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और उनकी तैनाती संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक दायरे में आती हैं, क्योंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और अनिवार्यता:
सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 01 सितंबर 2025 के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से माना है कि ‘फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट (RTE Act, 2009)’ की धारा 23 के तहत TET एक न्यूनतम निर्धारित योग्यता है। इसके दायरे में आने वाले विद्यालयों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाने के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है।

क्या मानसून सत्र में सरकार कोई अध्यादेश लाएगी? (अध्यादेश या विधायी योजना पर स्थिति)
अध्यादेश पर कोई प्रत्यक्ष घोषणा नहीं: संसद में शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिए गए आधिकारिक जवाब या लोकसभा के पटल पर रखे गए दस्तावेजों में मानसून सत्र के दौरान इस संबंध में किसी नए अध्यादेश को लाने के संबंध में सीधी घोषणा नहीं की गई है।
संसद में पेश विधेयक: यह प्राइवेट मेंबर बिल है
हालांकि, शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 23 में संशोधन करने के लिए संसद में ‘द राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ (The Right of Children to Free and Compulsory Education (Amendment) Bill, 2026) की विधायी प्रक्रिया पहले ही सामने आ चुकी है, जिसके माध्यम से सेवारत शिक्षकों के संरक्षण और सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख:
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 29 मई 2026 को अपने निर्णय के तहत TET योग्यता प्राप्त करने की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया है, इसलिए अदालती स्तर पर भी शिक्षकों को समय का विस्तार मिल चुका है।




