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सुशासन के दावों के बीच स्वास्थ्य महकमे में ‘सिंडिकेट’ का खेल? बीजापुर MCH में निरस्त टेंडर पर बैकडेटेड कार्यादेश क्यों जारी हुआ ? स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

GeM बिड को निरस्त करने के बाद री-टेंडर क्यों नहीं किया गया? निरस्त बिड के क्रमांक पर मैनुअल कार्यादेश किस नियम के तहत जारी हुआ? कार्यादेश पर तत्कालीन कलेक्टर ने सीधे हस्ताक्षर क्यों किए? सिविल सर्जन कार्यालय के किन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका रही? बिना कार्य प्रारंभ और भौतिक सत्यापन के 20 फीसदी अग्रिम भुगतान किसके आदेश पर हुआ? पूर्व में की गई शिकायतों पर लंबे समय तक निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई? भुगतान के बावजूद लिफ्ट आज तक चालू क्यों नहीं हुई? मरीजों को हो रही परेशानी और शासकीय धन के उपयोग की जवाबदेही किसकी है?

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रायपुर/ बीजापुर /प्रवक्ता डॉट कॉम 10 सितंबर 2026

( विजय सिंह ठाकुर)
छत्तीसगढ़ में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के दावों के बीच स्वास्थ्य विभाग की एक फाइल ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजापुर जिला अस्पताल के मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य संस्थान (MCH) में दो लिफ्ट लगाने से जुड़े मामले में आरोप है कि GeM पर निरस्त की जा चुकी निविदा के आधार पर बाद में मैनुअल कार्यादेश जारी किया गया। मामले से जुड़े दस्तावेज स्वास्थ्य मंत्री के विशेष सहायक को सौंपकर शिकायत की गई है। मंत्री कार्यालय ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।


₹65.50 लाख के लिफ्ट प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला
वर्ष 2022 में बीजापुर MCH भवन में दो लिफ्ट की स्थापना और बाह्य विद्युतीकरण के लिए करीब ₹65.50 लाख का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके लिए जीवन दीप समिति से अनुमति लेने के बाद GeM पोर्टल पर Bid No. GEM/2022/B/2516691, दिनांक 08 सितंबर 2022 को निविदा जारी की गई।
शिकायत में दावा किया गया है कि निविदा की अंतिम तिथि पर ही उक्त बिड को GeM पोर्टल पर Cancelled कर दिया गया। इसके बाद नियमानुसार नई निविदा प्रक्रिया अपनाए जाने के बजाय उसी निरस्त बिड के क्रमांक का इस्तेमाल करते हुए 31 मई 2023 को कार्यादेश क्रमांक 194 मैनुअल तरीके से जारी किया गया।
तत्कालीन कलेक्टर के सीधे हस्ताक्षर पर सवाल


मामले में तत्कालीन कलेक्टर एवं जीवन दीप समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार कटारा द्वारा सीधे कार्यादेश पर हस्ताक्षर किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस समय सिविल सर्जन के पद पर डॉ. ध्रुव पदस्थ थे, इसके बावजूद कार्यादेश पर कलेक्टर के स्तर से सीधे हस्ताक्षर किए गए। अब जांच का अहम बिंदु यही है कि कार्यादेश जारी करने की यह प्रक्रिया किस नियम और सक्षम अधिकार के तहत अपनाई गई।
बिना भौतिक सत्यापन 20 फीसदी अग्रिम भुगतान का आरोप


शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्य प्रारंभ होने और स्थल के भौतिक सत्यापन के पहले ही धमतरी की फर्म मेसर्स One Mantra को करीब 20 फीसदी अग्रिम भुगतान कर दिया गया।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि भुगतान के बावजूद MCH बीजापुर में लिफ्ट आज भी चालू नहीं हो सकी है। इससे गंभीर प्रसूताओं, नवजात शिशुओं और अन्य मरीजों को सीढ़ियों के जरिए आवागमन करना पड़ रहा है।


जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
GeM बिड को निरस्त करने के बाद री-टेंडर क्यों नहीं किया गया?
निरस्त बिड के क्रमांक पर मैनुअल कार्यादेश किस नियम के तहत जारी हुआ?
कार्यादेश पर तत्कालीन कलेक्टर ने सीधे हस्ताक्षर क्यों किए?
सिविल सर्जन कार्यालय के किन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका रही?
बिना कार्य प्रारंभ और भौतिक सत्यापन के 20 फीसदी अग्रिम भुगतान किसके आदेश पर हुआ?
पूर्व में की गई शिकायतों पर लंबे समय तक निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई?
भुगतान के बावजूद लिफ्ट आज तक चालू क्यों नहीं हुई?
मरीजों को हो रही परेशानी और शासकीय धन के उपयोग की जवाबदेही किसकी है?

मंत्री कार्यालय ने दिए जांच के निर्देश
मामले से जुड़े दस्तावेज स्वास्थ्य मंत्री के विशेष सहायक को सौंपे जाने के बाद मंत्री कार्यालय ने प्रकरण को गंभीरता से लिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, पूरे मामले की सूक्ष्म, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि निरस्त GeM बिड के बाद कार्यादेश जारी करने की पूरी प्रक्रिया किस स्तर पर और किन अधिकारियों की अनुमति से हुई। साथ ही, अग्रिम भुगतान तथा लिफ्ट के अब तक बंद रहने की तकनीकी और वित्तीय जिम्मेदारी भी जांच का अहम हिस्सा होगी।
प्रवक्ता डॉट कॉम इस मामले में सामने आने वाले जांच निष्कर्षों और दस्तावेजी तथ्यों को लगातार प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

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