छत्तीसगढ़ में जनगणना प्रगणकों का मानदेय अटका: भीषण गर्मी में काम के बावजूद भुगतान और प्रशिक्षण भत्ता न मिलने से रोष

रायपुर प्रवक्ता .कॉम 11 जून 2026
छत्तीसगढ़ में जनगणना के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग) का कार्य संपन्न होने के बाद भी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को उनके मानदेय और प्रशिक्षण भत्ते का भुगतान नहीं हुआ है। भीषण गर्मी में घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने वाले सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों में इसे लेकर गहरा असंतोष है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने समय-सीमा के भीतर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम पूरा किया, लेकिन अब भुगतान के लिए उन्हें प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
क्या है नियम और सरकार के निर्देश?


भारत सरकार के जनगणना महानिदेशक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना कार्य के लिए मानदेय भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और चरणबद्ध है:
चरणबद्ध भुगतान:

भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, जनगणना का कार्य दो चरणों में बंटा है। पहले चरण (मकान सूचीकरण) के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद उस चरण का मानदेय जारी करने का प्रावधान है।
भुगतान का माध्यम (DBT): मानदेय का भुगतान PFMS और DBT मॉड्यूल के माध्यम से सीधे प्रगणकों के बैंक खाते में किया जाना है। इसके लिए प्रगणकों को CMMS पोर्टल पर अपना विवरण (बैंक खाता, IFSC कोड आदि) पंजीकृत करना अनिवार्य है।
प्रशिक्षण भत्ता:
नियमानुसार, जनगणना प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और अन्य कर्मियों को प्रतिदिवस के हिसाब से प्रशिक्षण भत्ता दिया जाना है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान जलपान और अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी राशि निर्धारित है, जिसे राज्य/जिला प्रशासन को समय पर वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रमाणन की अनिवार्यता: भुगतान तब जारी किया जाता है जब संबंधित प्रगणक या पर्यवेक्षक द्वारा अपना कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाता है और चार्ज अधिकारी (Charge Officer) द्वारा पोर्टल पर इसका सफल समापन (Certification) दर्ज कर दिया जाता है।
प्रशासनिक शिथिलता बनी कारण?
कर्मचारियों का आरोप है कि काम पूरा होने के बावजूद जिला स्तर पर चार्ज अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर प्रमाणन (Certification) में देरी की जा रही है, जिसके कारण सीधे खाते में पैसा नहीं पहुँच रहा है। कई प्रगणकों का कहना है कि जब काम समय पर लिया गया, तो भुगतान में देरी क्यों?
अनुमानित कुल कर्मचारी:
पूरे प्रदेश के सभी जिलों और नगरीय निकायों को मिलाकर लगभग 55,000 से 60,000 प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) की ड्यूटी लगाई गई है।
कर्मचारियों का कार्य विभाजन:
औसतन एक प्रगणक (Enumerator) को 1 HLB की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके दायरे में लगभग 150 से 200 मकान या करीब 850 की आबादी आती है। प्रत्येक 5 से 6 प्रगणकों के काम की निगरानी के लिए 1 सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
इस प्रकार लगभग 48 हजार से ज्यादा hlb ब्लॉकों को कवर करने के लिए करीब 60 हजार सरकारी शिक्षक, पटवारी, राजस्व कर्मी और नगरीय निकाय के कर्मचारी इस काम में दिन-रात जुटे रहे हैं, जिन्हें अब अपने प्रथम चरण के मानदेय का इंतजार है।





