एसआईआर (SIR) में शिक्षकों की तैनाती पर हाईकोर्ट सख्त: चुनाव आयोग से पूछा- क्या आप आर्टिकल 324 की आड़ में जो चाहें वो करते हैं? कहा आयोग को ऐसी ड्यूटी लगाने का अधिकार नहीं !
वकील ने कहा कि चुनाव आयोग को 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपूल एक्ट' की धारा 13 बी (2) से कर्मचारियों को काम पर लगाने की शक्ति मिलती है, और किसी भी तरह की दिक्कत से बचने के लिए इस शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी को भी दिए जा रहे मानदेय या मुवावजे में हमें कोई दिलचस्पी नहीं है। क्या आपके जारी किए गए निर्देशों को जरूरी कहा जा सकता है? क्या आप बस यह कह सकते हैं, हम मुआवजा दे रहे हैं

नई दिल्ली:
प्रवक्ता.कॉम 26 जुलाई 2026
दिल्ली हाईकोर्ट ने एसआईआर (SIR) ड्यूटी के लिए शिक्षकों की तैनाती को लेकर चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने चुनाव आयोग से कड़े शब्दों में पूछा है कि वह किस अधिकार के तहत स्कूल शिक्षकों को एसआईआर (वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) पर काम करने का निर्देश दे रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच अधिवक्ता राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव से जुड़े कामों के लिए शिक्षकों की सेवाओं का इस्तेमाल करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और सवाल:
आर्टिकल 324 पर सवाल: हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि क्या आप आर्टिकल 324 की आड़ में जो चाहें वो कर सकते हैं? अदालत ने पूछा कि प्रदेश में स्कूल शिक्षकों को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े कामों के लिए क्यों तैनात किया गया है?
मानदेय और छुट्टियां:
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी को भी दिए जा रहे मानदेय या मुवावजे में हमें कोई दिलचस्पी नहीं है। क्या आपके जारी किए गए निर्देशों को जरूरी कहा जा सकता है? क्या आप बस यह कह सकते हैं, हम मुआवजा दे रहे हैं, इसलिए आ जाओ और उनकी छुट्टियां खराब कर दें, क्या उन्हें आराम की जरूरत नहीं है?
शिक्षकों की छुट्टियां:
चुनाव आयोग के एक वकील द्वारा यह कहे जाने पर कि शिक्षकों को केवल छुट्टियों और गैर-शिक्षण घंटों के दौरान काम करना होता है, अदालत ने सवाल किया कि शिक्षक नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह छुट्टी के हकदार क्यों नहीं हैं और उन्हें छुट्टियों के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के तौर पर काम करने के लिए क्यों कहा जाता है?
चुनाव आयोग का पक्ष:
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील संजय वशिष्ठ ने तर्क दिया कि दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और आखिरकार वोटर लिस्ट में सुधार की ड्यूटी के लिए केवल 10 से 14 प्रतिशत स्कूल शिक्षकों को ही बुलाया गया था।
वकील ने कहा कि चुनाव आयोग को ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपूल एक्ट’ की धारा 13 बी (2) से कर्मचारियों को काम पर लगाने की शक्ति मिलती है, और किसी भी तरह की दिक्कत से बचने के लिए इस शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है।
इस पर अदालत ने कहा कि भले ही भारतीय चुनाव आयोग कर्मचारियों को वालंटियर कहता है, लेकिन उनके पास एसआईआर ड्यूटी से इनकार करने का कोई विकल्प नहीं होता। अदालत ने कहा कि अगर आयोग भागीदारी को स्वैच्छिक घोषित कर दे, तो याचिका का निपटारा किया जा सकता है।
अगली सुनवाई:
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग को अपना पक्ष बताते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए तय की है।





