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छत्तीसगढ़ में ‘टीईटी अनिवार्यता’ पर सस्पेंस, असमंजस में सवा लाख शिक्षक, सरकार के रुख का इंतजार

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 14 जून 2026

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कार्यरत प्राथमिक और माध्यमिक शाला के शिक्षकों के लिए ‘टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा)’ की अनिवार्यता और पदोन्नति का मामला एक बार फिर गरमा गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा इन-सर्विस शिक्षकों के लिए भी टीईटी को संवैधानिक आवश्यकता बताने और हाल ही में पुनर्विचार याचिका पर आए फैसले के बाद प्रदेश के करीब 80500 से अधिक शिक्षकों की धड़कनें तेज हैं। शिक्षक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार इस कानूनी संकट पर क्या अंतिम निर्णय लेती है।

क्या है पूरा विवाद और नया मोड़?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में स्पष्ट किया है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना पहली प्राथमिकता है, इसलिए सेवा में मौजूद शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य है। हालांकि, कोर्ट ने सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए इसकी समय सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया है।किन्हें मिली छूट: जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में 5 साल से कम का समय बचा है, उन्हें परीक्षा से छूट दी गई है।पदोन्नति पर पेंच: बिना टीईटी पास किए शिक्षकों को अगली उच्च श्रेणी (जैसे प्रधान पाठक या उच्च वर्ग शिक्षक) में पदोन्नति नहीं दी जाएगी।

बिलासपुर हाईकोर्ट भी पूर्व में पदोन्नति के लिए टीईटी को आवश्यक बता चुका है।भर्ती नियम 2026 और सरकार का रुखशिक्षकों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अधिसूचित ‘स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026’ के तहत कुछ प्रावधान जोड़े गए थे, जिसमें कहा गया था कि कार्यरत शिक्षकों को पूर्व की पात्रता के आधार पर ही लाभ मिलेगा और टीईटी मुख्यतः ‘सीधी भर्ती’ (Direct Recruitment) के लिए जरूरी होगी।लेकिन सुप्रीम कोर्ट का ताजा रुख इस मामले में बिल्कुल कड़ा है। न्यायालय ने साफ कहा है कि कोई भी राज्य सरकार इस राष्ट्रीय मानक (NCTE Guidelines) को शिथिल नहीं कर सकती।

शिक्षकों की चिंताएं: “20 साल बाद परीक्षा कैसे दें?”

शिक्षक संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक पिछले 15 से 20 वर्षों से दूरस्थ अंचलों में पढ़ा रहे हैं, उनके लिए इस उम्र में दोबारा प्रतियोगी परीक्षा में बैठना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। अगर सरकार ने कोई बीच का रास्ता या विभागीय स्तर पर विशेष प्रशिक्षण/पात्रता का मार्ग नहीं निकाला, तो अगस्त 2028 के बाद हजारों शिक्षकों के सामने अनिवार्य सेवानिवृत्ति या सेवा समाप्ति जैसा बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो सकता है।

आगे क्या? इस पर शिक्षकों की नजर

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इस समय विधि विशेषज्ञों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राज्य के सेवा नियमों के समन्वय को लेकर राय ले रहे हैं। सवा लाख शिक्षकों को अब मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के उस आधिकारिक आदेश का इंतजार है, जो यह तय करेगा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में शिक्षकों को क्या राहत दे पाती है।इस विषय पर कानूनी विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रभाव को बारीकी से समझने के लिए आप यह TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला देख सकते हैं, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि इन-सर्विस शिक्षकों को कोर्ट से कितनी समय-सीमा मिली है और इसका क्या असर होगा।

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