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छत्तीसगढ़: शिक्षा विभाग का बढ़ा दबाव, लेकिन जवाब दे गए ‘TBC’ और ‘VSK’ ऐप्स के सर्वर; हजारों शिक्षक परेशान

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 16 जून 2026

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शिक्षा विभाग द्वारा एक तरफ डिजिटल अटेंडेंस और नई पाठ्यपुस्तकों की ऑनलाइन स्कैनिंग को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ विभाग के तकनीकी पुर्जे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। सर्वर डाउन होने के कारण राज्य के हजारों शिक्षक न तो अपनी उपस्थिति दर्ज करा पा रहे हैं और न ही किताबों की स्कैनिंग कर पा रहे हैं। इस तकनीकी खराबी के बीच विभाग के आला अधिकारियों द्वारा लगातार बनाए जा रहे दबाव से शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

​’विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऐप का सर्वर ठप, नहीं हो रही ऑनलाइन हाजिरी

​राज्य में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति (Online Attendance) की मॉनिटरिंग के लिए विद्या समीक्षा केंद्र द्वारा VSK ऐप तैयार किया गया है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस ऐप का सर्वर पूरी तरह क्रैश है। सुबह स्कूल पहुँचने के बाद हजारों शिक्षक ऐप पर लॉगिन करने का प्रयास करते हैं, लेकिन स्क्रीन पर सिर्फ ‘लोडिंग’ या ‘एरर’ दिखाई देता है। आलम यह है कि कई क्षेत्रों में शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज करने के चक्कर में घंटों परेशान होना पड़ रहा है, जिससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

​TBC ऐप से पुस्तकों की स्कैनिंग भी अटकी

​कुछ ऐसा ही हाल पाठ्य पुस्तक निगम के TBC ऐप का भी है। इस बार विभाग ने सख्त नियम बनाया है कि बच्चों को वितरित की जाने वाली नई पाठ्यपुस्तकों को क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए स्कैन करके ऑनलाइन एंट्री करनी होगी। लेकिन यह ऐप भी पूरी तरह जवाब दे चुका है। सर्वर एरर के कारण शिक्षकों के फोन में यह ऐप लॉगिन ही नहीं हो रहा है।

​एक तरफ तकनीकी फेलियर, दूसरी तरफ कार्रवाई की धमकी

​शिक्षकों का कहना है कि वे तकनीकी रूप से विभाग का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन जब सिस्टम ही काम नहीं कर रहा, तो वे क्या करें?

दावों की चकाचौंध में फीका रहा शाला प्रवेशोत्सव

​छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नया सत्र तो शुरू हो गया, लेकिन इस बार का ‘शाला प्रवेशोत्सव’ बदहाली और बदइंतजामी की भेंट चढ़ गया। विभाग और विभागीय मंत्री जहां जन्मदिन की बधाई स्वीकार करने और मंचों से तरह-तरह के बड़े-बड़े दावे करने में मशगूल रहे, वहीं जमीनी हकीकत ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी।

​रायपुर, बिलासपुर, कबीरधाम, मुंगेली और जीपीएम सहित प्रदेश के तमाम जिलों में ऑनलाइन अटेंडेंस ऐप, नेटवर्क की किल्लत की समस्या पहले दिन से ही सिरदर्द बनी रही।

रायपुर के ही बीरगांव
कचना
मठपुरेना
कुंरा
मोहदी सेरीखेड़ी सहित कई संकुल में सिस्टम ठप्प रहा। जीपीएम के पेंड्रा, मरवाही, सकोला, आमाडांड और भाडी आदि शामिल हैं

हद तो तब हो गई जब प्रवेशोत्सव के पहले दिन बच्चों का स्वागत करने के लिए विभाग के पास न तो पर्याप्त किताबें थीं और न ही स्कूल यूनिफॉर्म। बिना गणवेश और बिना किताबों के नौनिहाल खाली हाथ बैठने को मजबूर हुए।

जल्दबाजी की मार झेलते स्कूल

यह साफ नजर आ रहा है कि बिना किसी ‘फूल-प्रूफ’ (ठोस) तैयारी और बिना बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त किए, सिर्फ कागजी वाहवाही लूटने के लिए स्कूलों को खोलने में भारी जल्दबाजी दिखाई गई।

शिक्षकों का दर्द: “एक तरफ ऐप खुलता नहीं है, दूसरी तरफ संकुल और जिला स्तर के अधिकारी वॉट्सऐप ग्रुपों में नोटिस भेजकर जल्द से जल्द काम पूरा करने का दबाव बना रहे हैं। काम न होने पर वेतन रोकने या अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। तकनीकी सुधार करने के बजाय सारा दोष शिक्षकों पर मढ़ा जा रहा है।”

​मुख्य समस्याएं जो शिक्षक झेल रहे हैं:

लॉगिन एरर: ऐप खोलने पर यूजर आईडी और पासवर्ड ‘अमान्य’ (Invalid) बताता है या पेज आगे नहीं बढ़ता।

नेटवर्क और सर्वर टाइमआउट: ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क वैसे ही कमजोर है, ऊपर से मुख्य सर्वर पर लोड होने के कारण ऐप रिस्पॉन्स नहीं कर रहा है।

समय की बर्बादी: सुबह का कीमती समय बच्चों को पढ़ाने के बजाय सिर्फ मोबाइल पर ऐप री-स्टार्ट करने में बीत रहा है।

​शिक्षक संगठनों ने की व्यावहारिक समाधान की मांग

​इस पूरे मामले पर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। संगठनों का कहना है कि जब तक विभाग अपने ऐप्स के सर्वर को पूरी तरह अपग्रेड और मजबूत नहीं कर लेता, तब तक शिक्षकों पर किसी भी प्रकार का मानसिक दबाव न बनाया जाए। यदि ऑनलाइन हाजिरी और स्कैनिंग अनिवार्य करनी है, तो पहले उसकी तकनीकी खामियों को दूर किया जाना चाहिए, अन्यथा शिक्षकों को ऑफलाइन काम करने की छूट दी जाए।

​अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस तकनीकी गड़बड़ी को कब तक सुधार पाता है या फिर शिक्षक इसी तरह कागजी और डिजिटल दबाव के बीच पिसते रहेंगे।

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