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DPI के नए फरमान से भड़के शिक्षक: ‘बिना तैयारी’ थोपा जा रहा vsk सिस्टम, जून के वेतन पर रोक की चेतावनी से नाराजगी संचालनालय में प्रशासनिक सर्जरी जरूरी, गलत निर्णय ले रहे अफसर

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 17 जून 2026

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​नवा रायपुर। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) छत्तीसगढ़ द्वारा जारी एक नए आदेश ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। संचालनालय द्वारा 17 जून 2026 को जारी पत्र (क्र./एम.आई.एस./N-123/433) में साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप और आधार सक्षम बायोमैट्रिक प्रणाली के माध्यम से ही सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।
​बड़ी बात यह है कि इस ऑनलाइन उपस्थिति के अभाव में जून माह का वेतन भुगतान नहीं होने की चेतावनी दी गईहै, जिसने जलती आग में घी का काम किया है।
​क्या है पूरा मामला?


​आदेश के अनुसार, 16 जून से ही सभी शालाओं, संभागीय, जिला, विकासखंड स्तरीय कार्यालयों, डाइट, बी.टी.आई. और शासकीय शिक्षा महाविद्यालयों में इस प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद कई कार्यालयों से नोडल अधिकारियों की जानकारी नहीं मिली है या जो जानकारी भेजी गई है वह त्रुटिपूर्ण है। इसके बावजूद, मैदानी स्तर पर कमियों को दूर करने के बजाय सीधे ‘वेतन रोकने’ का कड़ा रुख अपनाया गया है।
​”बेवजह शिक्षकों को उकसा रहा है DPI”


​शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों का आरोप है कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) बिना जमीनी हकीकत और तकनीकी ढाँचे को सुधारे, तानाशाही रवैया अपनाकर बेवजह शिक्षकों को उकसाने का काम कर रहा है।
​तकनीकी खामियां: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी समस्या है। ऐसे में ‘VSK App’ का

डीपीआई में प्रशासनिक सर्जरी की मांग तेज कांग्रेसी मानसिकता के पुराने अधिकारी को हटाने की मांग

​शिक्षकों का कहना है कि 2018 में जिस तरह ब्यूरोक्रेसी के गलत फैसलों के कारण शिक्षकों ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था, ठीक वैसी ही बिसात ये अधिकारी फिर से बिछा रहे हैं।

​अब मांग उठने लगी है कि यदि भाजपा सरकार को शिक्षकों के बीच अपनी साख बचानी है और विभाग में सुशासन लाना है, तो सबसे पहले DPI से कांग्रेस काल के इन प्रभावी अफसरों को हटाकर किसी संवेदनशील और निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी को कमान सौंपनी होगी। जब तक विभाग की प्रशासनिक सर्जरी नहीं होगी, तब तक ऐसे ‘विवादास्पद’ और उकसाने वाले आदेश निकलते रहेंगे।

सही निर्णय नहीं लेने दे रहे ऐसे अधिकारी”

​सूत्रों और कर्मचारी प्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि अशोक नारायण बंजारा जैसे अधिकारी, जो पिछली सरकार की नीतियों के हमकदम रहे हैं, वे वर्तमान सरकार को शिक्षा और शिक्षकों के हित में सही और व्यावहारिक निर्णय नहीं लेने दे रहे हैं।

जमीनी हकीकत से दूर फैसले: आरोप है कि बिना तैयारी के vsk ऐप थोपना और सीधे जून महीने का वेतन रोकने जैसा अव्यावहारिक आदेश जारी करना इन्हीं अधिकारियों की ‘लूप-होल’ वाली कार्यप्रणाली का हिस्सा है, ताकि मैदानी स्तर पर अराजकता फैले और शिक्षकों का गुस्सा वर्तमान सरकार पर फूटे।


​अधूरा डेटा: खराब नेटवर्क

खुद विभाग के आदेश में लिखा है कि पोर्टल पर जानकारी अब तक अद्यतन (Update) नहीं हो पाई है। जब सिस्टम ही तैयार नहीं है, तो शिक्षकों के वेतन पर तलवार क्यों लटकाई जा रही है?
​चुनाव में भारी पड़ेगी शिक्षकों की नाराजगी!
​शिक्षा जगत के जानकारों और शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार और विभाग का यह अड़ियल रुख आने वाले चुनावों में भारी पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ में शिक्षक हमेशा से चुनाव प्रक्रिया की रीढ़ रहे हैं और एक बड़ा वोट बैंक भी हैं।
​”यदि तकनीकी खामियों के चलते जून महीने का वेतन रोका गया, तो प्रदेश भर के शिक्षक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। विभाग की इस प्रशासनिक विफलता और उकसावे वाली कार्रवाई का खामियाजा आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।”

शिक्षकों ने तकनीकी खामियां दूर करें
​शिक्षकों की मांग है कि पहले सभी स्कूलों और कार्यालयों में नेटवर्क और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त किया जाए, और जब तक पूरी व्यवस्था फुलप्रूफ न हो जाए, तब तक वेतन रोकने जैसे दंडात्मक और तानाशाही आदेशों पर तुरंत रोक लगाई जाए।

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