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वेतन रोकने की सनक या प्रशासनिक तानाशाही? बेमेतरा में मौखिक आदेशों के सहारे चल रहा सिस्टम, कर्मचारियों में भारी आक्रोश”

राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सुस्ती का हवाला देते हुए जिला प्रशासन द्वारा लगभग 800 स्वास्थ्यकर्मियों का जुलाई माह का वेतन आगामी आदेश तक रोकने की बड़ी कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद अब शिक्षा विभाग में भी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) का वेतन रोकने के मौखिक निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। बिना किसी लिखित आदेश और नियमों को ताक पर रखकर केवल मौखिक फरमानों के जरिए वेतन रोकने की इस सनक ने पूरे जिले के कर्मचारियों और शिक्षक संघों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

रायपुर​/बेमेतरा / प्रवक्ता.कॉम 23 जुलाई 2026

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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली और अजीबोगरीब फरमानों इन दिनों भारी चर्चा और विवादों का विषय बने हुए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सुस्ती का हवाला देते हुए जिला प्रशासन द्वारा लगभग 800 स्वास्थ्यकर्मियों का जुलाई माह का वेतन आगामी आदेश तक रोकने की बड़ी कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद अब शिक्षा विभाग में भी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) का वेतन रोकने के मौखिक निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। बिना किसी लिखित आदेश और नियमों को ताक पर रखकर केवल मौखिक फरमानों के जरिए वेतन रोकने की इस सनक ने पूरे जिले के कर्मचारियों और शिक्षक संघों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के 800 कर्मियों का वेतन ठप, परिवार पर संकट

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीएमएचओ डॉ. अमृत रोडेलकर द्वारा साजा, बेरला और खंडसरा विकासखंड के करीब 800 नियमित एवं संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का जुलाई का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर की समय-सीमा (टीएल) बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत गर्भवती महिलाओं का ऑनलाइन पंजीयन, नियमित टीकाकरण और अन्य जनस्वास्थ्य गतिविधियों के लक्ष्य पूर्ण न होने पर यह नाराजगी जताई गई थी।

​इस कार्रवाई की जद में बीएमओ, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, एएनएम, एमपीडब्लू, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, फार्मासिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर और लिपिकीय कर्मचारी तक शामिल हैं। स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राजेश जायसवाल ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि अधिकांश कर्मचारी अपने मासिक वेतन से ही परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वेतन रुकने से बैंक ऋण की किस्तें, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों का इलाज प्रभावित हो रहा है, जिससे कर्मचारियों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

शिक्षा विभाग में भी बीईओ का वेतन रोकने के मौखिक निर्देश

​स्वास्थ्य विभाग के बाद अब शिक्षा विभाग में भी इसी तरह के मनमाने और तानाशाही रवैये के संकेत मिलने लगे हैं। चर्चा है कि शिक्षा विभाग के भीतर ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) का वेतन रोकने के लिए भी मौखिक निर्देश जारी किए गए हैं। नवागढ़ बीईओ का रोका गया वेतन अब जारी हुआ । बेमेतरा , बेरला में भी इसी तरह की कार्यवाही के लिए निर्देश दिया गया ।

प्रशासनिक जानकारों और कर्मचारियों का मानना है कि बिना किसी लिखित और विधिवत प्रशासनिक प्रक्रिया के, केवल मौखिक आदेशों के आधार पर वेतन रोकने की यह प्रवृत्ति न सिर्फ सेवा नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह जिले में फैलती गहरी प्रशासनिक अराजकता को भी दर्शाती है।

कर्मचारियों में तीखा रोष: “दंडात्मक सनक के बजाय सहयोग दे प्रशासन”

​कर्मचारी संगठनों और मैदानी अमले का कहना है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में यदि कमियां हैं, तो प्रशासन को दंडात्मक कार्रवाई और आतंक का माहौल बनाने के बजाय कर्मचारियों को प्रोत्साहन और सहयोग देकर काम कराना चाहिए। जिस प्रकार से अंधाधुंध तरीके से वेतन रोकने के फरमान जारी किए जा रहे हैं, उससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा की भावना घर कर गई है। कर्मचारियों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की तानाशाही कार्यप्रणाली पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा और इस पूरी व्यवस्थागत विफलता के लिए जिम्मेदार उच्चाधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग जोर पकड़ेगी।

कार्रवाई की वजह:

राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम (विशेषकर एनएचएम के तहत गर्भवती महिलाओं की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया, नियमित टीकाकरण और अन्य जनस्वास्थ्य गतिविधियों) की प्रगति कमजोर और असंतोषजनक पाए जाने के कारण यह कदम उठाया गया है.

आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना: इस तरह की कार्यप्रणाली से कर्मचारियों के पारिवारिक जीवन, वित्तीय प्रबंधन और मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है.साजा, बेरला और खंडसरा विकासखंड.

प्रभावित कर्मचारी: करीब 800 नियमित एवं संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी (जिसमें बीएमओ, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, एएनएम, एमपीडब्लू, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, फार्मासिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लिपिकीय कर्मचारी व अन्य शामिल हैं).

आदेश: सीएमएचओ डॉ. अमृत रोडेलकर द्वारा कलेक्टर की समय-सीमा (टीएल) बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद जुलाई माह का वेतन आगामी आदेश तक रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं तथा जिला कोषालय अधिकारी को भी पत्र भेजा गया है.

कर्मचारियों में आक्रोश और विरोध:

संघ का कड़ा रुख: स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया है.

परिवार के भरण-पोषण की समस्या: संघ के जिलाध्यक्ष राजेश जायसवाल ने बताया कि अधिकांश कर्मचारी अपने मासिक वेतन पर ही परिवार का भरण-पोषण करते हैं. वेतन रुकने से बैंक ऋण की किस्तें, बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों का इलाज और अन्य घरेलू खर्चों के कारण आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

ज्ञापन सौंपने की तैयारी: संघ द्वारा इस संबंध में कलेक्टर और सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपकर वेतन तत्काल जारी करने की मांग की जाएगी

कलेक्टर के अधिकारों पर माननीय उच्च न्यायालय का रुख

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में स्पष्ट किया है कि:कलेक्टर सीधे अनुशासनात्मक प्राधिकारी नहीं हैं:

जिन विभागों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण आदि) के कर्मचारियों के नियुक्ति अधिकारी या अनुशासनात्मक प्राधिकारी कलेक्टर नहीं हैं, वहां कलेक्टर सीधे तौर पर किसी नियमित शासकीय सेवक का वेतन स्थायी रूप से या दंड स्वरूप नहीं रोक सकते।

मनमाना आदेश अवैध:

बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए या बिना किसी विभागीय प्रक्रिया के, केवल प्रशासनिक बैठक या निरीक्षण के दौरान काम में कमी पाए जाने पर सीधे वेतन रोकने का मौखिक या लिखित आदेश देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत और अवैध माना जाता है।

अपवाद: कलेक्टर कब निर्देश दे सकते हैं?

कलेक्टर जिले के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते निम्नलिखित असाधारण परिस्थितियों में वेतन रोकने की अनुशंसा या अस्थायी निर्देश दे सकते हैं:

चुनावी ड्यूटी या राष्ट्रीय कार्यक्रम:

यदि कर्मचारी चुनाव कार्य (Election Duty) या जनगणना जैसे अनिवार्य राष्ट्रीय कार्यों से बिना अनुमति गायब रहता है।

वित्तीय अनियमितता: यदि किसी विभागाध्यक्ष या DDO स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका हो, तो कोषालय अधिकारी को अस्थायी जांच पूरी होने तक आहरण रोकने को कहा जा सकता है।

  1. संविदा या मानदेय कर्मचारी: जिला स्तर के संविदा, दैनिक वेतनभोगी या कलेक्टर दर पर कार्यरत कर्मचारियों के मामलों में, जहां कलेक्टर स्वयं सक्षम प्राधिकारी होते हैं।

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