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आठवां वेतन आयोग: अलग-अलग पे-लेवल के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव, 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना

वेतन संरचना में बड़े बदलाव की तैयारी: 8वें वेतन आयोग में 2.00 से 4.00 तक फिटमेंट फैक्टर का नया फार्मूला

15 सितम्बर 2026

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नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

​केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए गठित होने वाले आठवें वेतन आयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, इस बार सभी पे-लेवल के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर की जगह अलग-अलग स्तरों के आधार पर 2.00 से लेकर 4.00 तक का अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह लागू होता है, तो कर्मचारियों के मूल वेतन, भत्तों और कुल आय में संतुलित एवं महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिलेगी।

क्या है प्रस्तावित वेतन ढांचा?

​नए प्रस्ताव के तहत निचले पे-लेवल के कर्मचारियों के लिए अधिक फिटमेंट फैक्टर रखा गया है, ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों को आर्थिक रूप से अधिक लाभ मिल सके।

लेवल 1: वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 पर 4.00 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव है, जिससे नया अनुमानित मूल वेतन ₹72,000 हो जाएगा।

लेवल 2 से 5: फिटमेंट फैक्टर 3.833 से घटते क्रम में 3.25 तक प्रस्तावित है, जिससे मूल वेतन ₹76,251 से ₹94,900 तक पहुंचेगा।

लेवल 6 से 10: मध्यम स्तर के पदों के लिए 3.10 से 2.70 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित है।

उच्च स्तर (लेवल 11 से 18): उच्च पदों के लिए 2.60 से 2.00 तक फिटमेंट फैक्टर रहेगा। लेवल 18 के तहत अधिकतम मूल वेतन ₹5,000,000 अनुमानित है।

कर्मचारी संगठनों की मांगें और आंदोलन

​आठवें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने देशव्यापी साइकिल रैलियां निकाली हैं और अपना आंदोलन तेज कर दिया है। संगठनों की प्रमुख मांगें हैं:

मूल वेतन, महंगाई भत्ता, शिक्षा व स्वास्थ्य भत्तों में पर्याप्त वृद्धि।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर पुनर्विचार।

सभी पे-लेवल के लिए न्यायसंगत फिटमेंट फैक्टर तथा पदोन्नति एवं सेवा शर्तों में पारदर्शिता।

बयान और प्रतिक्रियाएं

“हमारे सरकारी कर्मचारी देश की रीढ़ हैं। उनके कल्याण के लिए सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।”

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

“अलग-अलग लेवल के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करना एक व्यावहारिक कदम है। इससे निचले लेवल के कर्मचारियों को अधिक लाभ मिलेगा और वेतन संरचना संतुलित बनेगी।”

— डॉ. अरविंद मेहता, आर्थिक विश्लेषक

आगे की प्रक्रिया:

वर्तमान में वित्तीय स्थिति का आकलन किया जा रहा है। विभिन्न हितधारकों से चर्चा के बाद अंतिम रिपोर्ट व सिफारिशें तैयार की जाएंगी, जिसे 1 जनवरी 2026 से लागू किए जाने की संभावना है।

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