रेलवे का बड़ा कदम: अब टीटीई की वर्दी पर लगेंगे कैमरे, यात्री और रेलकर्मियों के बीच की हर बातचीत होगी रिकॉर्ड
ट्रेनों में अक्सर बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों, जुर्माना लगाने की प्रक्रिया या सीटों के आवंटन को लेकर मामूली विवाद गंभीर रूप ले लेते हैं।
प्रवक्ता.कॉम
16 अक्टूबर 2026
भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और टिकट चेकिंग के दौरान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में टिकट चेकिंग के दौरान यात्रियों और टिकट परीक्षकों (TTE) के बीच होने वाले विवादों पर लगाम लगाने के लिए अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में भोपाल मंडल ने अपने टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए 56 बॉडी वियरिंग कैमरों की खरीद का आधिकारिक ऑर्डर दे दिया है।
इन कैमरों के जरिए ड्यूटी के दौरान कर्मचारी और यात्री के बीच होने वाली हर बातचीत और घटनाक्रम को पूरी तरह रिकॉर्ड किया जाएगा, जिससे दोनों पक्षों के बयानों की सत्यता की पुष्टि करने में आसानी होगी।
शान-ए-भोपाल और वंदे भारत ट्रेनों से होगी शुरुआत
रेलवे प्रशासन की योजना के अनुसार, इस व्यवस्था का श्रीगणेश पहले चरण में राजधानी की कुछ चुनिंदा और महत्वपूर्ण ट्रेनों से किया जाएगा।
इनमें शान-ए-भोपाल (भोपाल एक्सप्रेस), रीवांचल एक्सप्रेस और आधुनिक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें मुख्य रूप से शामिल होंगी।
इन ट्रेनों में तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ को प्राथमिकता के आधार पर ये बॉडी वियरिंग कैमरे उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके बाद, शुरुआती अनुभवों और कैमरों की उपलब्धता को देखते हुए इस व्यवस्था का दायरा अन्य प्रमुख ट्रेनों तक भी बढ़ाया जाएगा।
दो साल से महसूस की जा रही थी जरूरत
भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से लगातार टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए बॉडी वियरिंग कैमरों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
वर्तमान में 56 कैमरों के साथ इस योजना की शुरुआत की जा रही है।
आगामी 2 से 3 महीनों के भीतर इन कैमरों का जमीनी स्तर पर इस्तेमाल भी शुरू कर दिया जाएगा।
इसके बाद धीरे-धीरे इस व्यवस्था का विस्तार करते हुए भोपाल मंडल के लगभग 320 कर्मचारियों (जिनमें बुकिंग और रिजर्वेशन काउंटर पर तैनात कर्मचारी भी शामिल हैं) तक इसे पहुँचाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
शिकायतों की त्वरित और पारदर्शी जांच में मिलेगी मदद
ट्रेनों में अक्सर बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों, जुर्माना लगाने की प्रक्रिया या सीटों के आवंटन को लेकर मामूली विवाद गंभीर रूप ले लेते हैं।
कई बार यात्री कर्मचारियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हैं, तो वहीं कर्मचारियों को भी ड्यूटी के दौरान अभद्रता का सामना करना पड़ता है।
ऐसे मामलों में सही तथ्यों के अभाव के कारण जांच पड़ताल में काफी लंबा समय लग जाता था और यह तय करना मुश्किल होता था कि विवाद की असल शुरुआत कहाँ से हुई।
अब कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने से हर घटना के वास्तविक तथ्यों की पुष्टि आसानी से हो जाएगी।
अधिकारी का बयान
“टीटीई और यात्रियों के बीच बातचीत व सीटों को लेकर जब भी शिकायतें सामने आती हैं, तो बॉडी वियरिंग कैमरों की रिकॉर्डिंग होने से घटना के वास्तविक तथ्यों की पुष्टि करने में बड़ी मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना तथा दोनों पक्षों को नियमों के दायरे में रहकर ज़िम्मेदारी से व्यवहार करने के लिए प्रेरित करना है।”
— सौरभ कटारिया (सीनियर डीसीएम, भोपाल रेल मंडल)






