छत्तीसगढ़ शिक्षक आंदोलन और शिक्षा मंत्री की वार्ता: अंदरखाने की पूरी इनसाइड स्टोरी उम्मीद है ! टेबल टॉक पर परिणाम बेहतर निकलेगा ! शिक्षकों ने पूछा हमारे हिस्से हर साल एक अग्नि परीक्षा क्यों साहब ? पढ़िए पूरी खबर .
आम शिक्षकों की पीड़ा: "हर साल देनी पड़ती है एक अग्नि परीक्षा, इस उम्र में टीईटी यातना नहीं तो क्या है? 1998 से सेवा दे रहे शिक्षकों का दर्द है कि उन्हें अब तक मानसिक सुकून नहीं मिला है! "
विजय सिंह ठाकुर एडिटर
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 25 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में शिक्षक समुदाय और शासन के बीच टीईटी (TET) अनिवार्यता को लेकर उपजा आक्रोश अपने चरम पर है। 25 वर्षों की लंबी सेवा दे चुके शिक्षकों के सामने जब यह संकट खड़ा हुआ कि नौकरी बचाने के लिए अब टीईटी परीक्षा पास करनी होगी, तो पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी भारी असंतोष फैल गया। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षक संगठनों और शिक्षा मंत्री के बीच होने वाली बैठकों और वार्ताओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। रात बहुत हो चुकी थी हमने मंत्री जी से संपर्क का प्रयास भी किया लेकिन बात नहीं हुई । लेट होने की वजह से स्पष्टीकरण नहीं मिल पाया लेकिन कल सब कुछ साफ हो जाएगा। बैठक की वजह जो भी हो शिक्षकों को राहत मिले ये जरूरी है।
आक्रोश की सुलगती चिंगारी और नीतिगत बयान
देशव्यापी असंतोष:
टीईटी अनिवार्यता और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में नौकरी पर मंडराते खतरे के कारण शिक्षकों में देशव्यापी आक्रोश है, जिसकी शुरुआत मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बहुत पहले हो चुकी थी और बाद में इसकी जद में छत्तीसगढ़ के शिक्षक भी आ गए।
शिक्षा मंत्री का बयान:
आज विभागीय बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि टीईटी के संबंध में सरकार मध्यप्रदेश की तर्ज पर ही निर्णय लेगी।
मीडिया की सक्रियता:
‘प्रवक्ता.कॉम’ ने मंत्री के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को न सिर्फ प्रमुखता से अटेंड किया और वीडियो साझा किया, बल्कि कल शाम को ही एक शिक्षक संगठन के प्रमुख को शिक्षा मंत्री से अनौपचारिक चर्चा करने का सुझाव भी दिया था।
ओएसडी अंकित चौहान का बुलावा और हड़ताल का बड़ा दबाव
मंत्री का बयान शाम तक वायरल होते ही विभिन्न शिक्षक संगठनों में श्रेय लेने की होड़ मच गई। हालांकि, इस पूरी हलचल और कल दोपहर 1 बजे तय हुई वार्ता के पीछे की असली वजह कुछ और ही थी:
उग्र आंदोलन की चेतावनी:
‘शिक्षक साझा मंच’ के नेतृत्व (रविंद्र राठौर, विकास राजपूत, प्रदीप पाण्डेय एवं अन्य) द्वारा 27 अगस्त 2026 से शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित आवास और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के ‘बगिया’ स्थित आवास के पास अनिश्चितकालीन हड़ताल की आधिकारिक घोषणा कर दी गई थी।
राजनीतिक दबाव:
रायपुर में हुई बीजेपी संगठन की बड़ी बैठक और मुख्यमंत्री के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संभावित दौरे के मद्देनजर शासन स्तर पर भारी राजनीतिक दबाव बना।
OSD का फोन:
इसी दबाव और उग्र आंदोलन की रूपरेखा को भांपते हुए शिक्षा मंत्री के ओएसडी अंकित चौहान (नोट: आलेख में उल्लिखित नाम) का बुलावा सबसे पहले ‘शिक्षक साझा मंच’ के नेताओं को प्राप्त हुआ।
श्रेय की सियासत बनाम ज़मीनी सच्चाई
अन्य शिक्षक संगठनों के आंदोलन और प्रभाव को भी नकारा नहीं जा सकता, वे भी पूरी तरह सक्रिय रहे हैं।
बावजूद इसके, शिक्षा मंत्री से वार्ता तय होने की मुख्य वजह ‘शिक्षक साझा मंच’ द्वारा घोषित प्रत्यक्ष घेराव और अनिश्चितकालीन हड़ताल का स्पष्ट राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव था।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पत्र या लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण कोई भी संगठन इस वार्ता या फैसले का शत-प्रतिशत आधिकारिक श्रेय लेने का दावा नहीं कर सकता।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा का सोशल मीडिया में जारी बयान
प्रशासनिक पहल:
दुर्ग में जिला प्रशासन (एडीएम और पुलिस कमिश्नर) के साथ हुई बैठक के बाद, शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधिमंडल को शिक्षा मंत्री के साथ चर्चा के लिए बुलाया गया है।
बैठक:
शिक्षा मंत्री के पीए/ओएसडी अंकित चौहान के फोन कॉल के माध्यम से 26 अगस्त को दोपहर 1 बजे यह उच्चस्तरीय बैठक तय की गई है, जिसमें मंच के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे।
आंदोलन जारी रहेगा:
शिक्षक साझा मंच ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बैठक में मांगों के समाधान पर ठोस निर्णय नहीं निकलता, तब तक 27 अगस्त से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारियां और प्रदर्शन पूरी ताकत से जारी रहेगा।
शिक्षकों के छलके दर्द और उम्मीदें
इस पूरे मुद्दे पर प्रदेशभर के शिक्षकों ने अपनी बेबाक प्रतिक्रिया दी है:
मोहन सिंह राजपूत, विमल कुमार, पंकज चौधरी, श्वेता तिवारी, गंगाधर गावंडे, अरविंद कुमार, पवन साहू और कन्हैया लाल बंजारे सहित सैकड़ों शिक्षकों ने सरकार से इस गंभीर विषय पर पूरी तरह सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद जताई है।
शिक्षकों का कहना है कि करियर के इस पड़ाव पर आकर पात्रता परीक्षा पास करने का दबाव मानसिक तनाव पैदा कर रहा है।
हालांकि, सरकार के साथ होने वाली आगामी बैठकों और उच्चस्तरीय चर्चाओं के बाद शिक्षकों को अब भी न्याय और सकारात्मक फैसले की आस है।





