डीए देने में विलंब से कर्मचारियों में बढ़ा आक्रोश, हितों की अनदेखी से पौने पांच लाख कर्मचारियों में निराशा दीपवाली पूर्व डी ए मिलने पर संशय के कर्मचारी संगठनों ने कहा नहीं दिया तो होगा आन्दोलन
मांग को लेकर मुख्य सचिव से मिला प्रतिनिधिमंडल; सीएस ने दिया आश्वासन, अंतिम निर्णय लेंगे मु
रायपुर प्रवक्ता. कॉम 22 अक्टूबर 2026
रायपुर। राज्य में कर्मचारियों और पेंशनधारियों को महंगाई भत्ता (डीए) तथा महंगाई राहत (डीआर) देने में हो रही देरी को लेकर शासकीय कर्मचारियों में फिर से भारी आक्रोश पनप रहा है। केंद्र के समान और देय तिथि से भत्ता न मिलने तथा कर्मचारी हितों की लगातार अनदेखी किए जाने से प्रदेश के लगभग पौने पांच लाख कर्मचारियों एवं पेंशनरों में गहरी निराशा व्याप्त है।
इंद्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर के अधिकारी-कर्मचारी संगठनों के समूह ‘एक मांग एक मंच अभियान’ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्य शासन के मुख्य सचिव विकासशील से मुलाकात कर उन्हें दीपावली के पूर्व डीए और डीआर के भुगतान की प्रमुख मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश संयोजक करन सिंह अटेरिया ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि उनकी प्रमुख मांग केंद्र के समान देय तिथि जनवरी 2026 से 2% लंबित महंगाई भत्ता (डीए) तथा महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान दीपावली त्योहार से पूर्व किया जाना है। कर्मचारियों ने यह भी मुद्दा उठाया कि पिछले 80 महीनों से डीए एरियर का भुगतान नहीं मिल पाया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की भावना बढ़ रही है।
मुलाकात के दौरान मुख्य सचिव ने मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक शीघ्र विचार करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय प्रावधानों और नीतिगत विषयों पर अंतिम और असल निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।
इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश सचिव डॉ. जितेंद्र सिंह ठाकुर, अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक गोपाल प्रसाद साहू, लघु वेतन कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री सुजान बिंद, पेंशनधारी कल्याण संघ के रायपुर जिलाध्यक्ष युनुस कुरैशी, स्टेट गैरेज वाहन चालक कर्मचारी संघ के प्रांतीय संयोजक बाल किशन साहू, अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रांतीय सचिव अजय खांडेकर, तथा मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह राजपूत सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दीपावली से पूर्व उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे






