छत्तीसगढ़ @ 26: 2000 के सपनों से 2026 की हकीकत तक—क्या जनता की उम्मीदों पर खरी उतरीं सरकारें?
अटल से साय तक: 26 वर्षों में कितना बदला छत्तीसगढ़ और क्या कहती है जनता की उम्मीद?
विजय सिंह ठाकुर
रायपुर प्रवक्ता. कॉम 1 नवंबर 2026
1 नवंबर 2000 को भारत के नक्शे पर 26वें राज्य के रूप में उभरा ‘छत्तीसगढ़’ आज अपनी स्थापना के 26वें वर्ष के सफर में खड़ा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत इस खनिज-समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से विविध क्षेत्र को अलग राज्य का दर्जा मिला था।
सन 2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग हुआ, तब इसके पास असीम संभावनाएं तो थीं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी, नक्सलवाद का बढ़ता साया और मध्य प्रदेश से अलग होने का प्रशासनिक दायित्व एक बड़ी चुनौती थी।
2000 से 2026: कहां से चले थे, कहां आ गए?
आर्थिक मजबूती
सन 2000 में छत्तीसगढ़ का बजट काफी सीमित था और राज्य की गिनती विकासशील क्षेत्रों में होती थी। आज वित्तीय वर्ष 2026-27 तक छत्तीसगढ़ का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹7.09 लाख करोड़ से अधिक का आंकड़ा छू चुका है।
ऊर्जा और उद्योग क्षेत्र
छत्तीसगढ़ देश का ऊर्जा केंद्र बनकर उभरा। कोरबा और भिलाई जैसे औद्योगिक शहर सीमेंट, स्टील और बिजली उत्पादन में देश के अग्रणी स्तंभ बने हुए हैं।
कृषि और ‘धान का कटोरा’
‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में कृषि तकनीकों, धान खरीदी पर पारदर्शी व्यवस्था और किसानों को मिले समर्थन मूल्य के चलते कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है।
नया रायपुर (अटल नगर) और कनेक्टिविटी
एक समय जहां रायपुर शहर ही प्रशासनिक केंद्र था, वहीं आज ‘नया रायपुर’ (अटल नगर) देश के सबसे सुव्यवस्थित नियोजित शहरों में गिना जाता है। बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर जैसे शहरों तक हवाई और रेल कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है।
राजनीतिक नेतृत्व
अटल जी की सोच, अजीत जोगी का शुरुआती खाका और रमन सिंह का लंबा कार्यकाल
अटल बिहारी वाजपेयी (राज्य निर्माता)
‘आप हमें लोकसभा सीटें दें, हम आपको राज्य देंगे’ — इस संकल्प के साथ अटल जी ने बिना किसी बड़े राजनीतिक टकराव के छत्तीसगढ़ राज्य का शांतिपूर्ण गठन सुनिश्चित किया।
अजीत जोगी (प्रथम मुख्यमंत्री)
नए बने राज्य में प्रशासनिक ढांचे को खड़ा करना, रायपुर को राजधानी के रूप में स्थापित करना और ब्यूरोक्रेसी की नींव रखना अजीत जोगी सरकार का मुख्य योगदान रहा।
डॉ. रमन सिंह (15 वर्षों का लंबा दौर)
2003 से 2018 तक 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान राज्य को सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी के मोर्चे पर बड़ा बदलाव देखने को मिला।
पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) में सुधार कर छत्तीसगढ़ को देश भर में ‘चावल वाले बाबा’ के मॉडल के रूप में पहचान दिलाई।
नया रायपुर का निर्माण, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और शिक्षा शहरों (जैसे दंतेवाड़ा का एजुकेशन सिटी) का खाका इसी दौर में खींचा गया।
भूपेश बघेल और विष्णु देव साय की सरकारें
बाद के वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, महतारी वंदन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से राज्य के विकास को आगे बढ़ाया गया।
क्या जनता की उम्मीदों पर खरी उतरीं सरकारें?
यह सवाल किसी भी लोकतंत्र के 26 साल के सफर का सबसे निष्पक्ष पैमाना होता है। सरकारों के कामकाज का अगर लेखा-जोखा देखा जाए:
सफलताएं और मजबूत पहलू:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सामाजिक सुरक्षा
राज्य ने खाद्यान्न सुरक्षा के मामले में मिसाल कायम की है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक भुखमरी की समस्या पर रोक लगी।
बिजली और सड़कों का नेटवर्क
राज्य के दूर-दराज के गांवों और बस्तर-सरगुजा के अंचलों तक 24×7 बिजली और बुनियादी सड़कों की पहुंच स्थापित हुई।
नक्सलवाद पर अंकुश
2000 के शुरुआती दशकों में जो नक्सलवाद बस्तर और आसपास के जिलों में गंभीर चुनौती था, उस पर पिछले 25-26 वर्षों में सुरक्षा बलों के अभियानों और विकास कार्यों के जरिए बहुत हद तक नियंत्रण पाया गया है। बस्तर के कई अंदरूनी इलाकों में नए स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और बाजार खुले हैं।
चुनौतियां और जहां कमी रह गई:
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पलायन और रोजगार
खनिजों से भरपूर होने के बावजूद बस्तर और सरगुजा के कई इलाकों से युवाओं का मौसमी पलायन पूरी तरह नहीं रुक सका है।
मानव विकास सूचकांक
बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) मजबूत होने के बावजूद कुपोषण, मातृ मृत्यु दर और दूरस्थ इलाकों में उच्च शिक्षा के स्तर पर अभी और काम करने की आवश्यकता है।
औद्योगिकीकरण बनाम पर्यावरण संतुलन
खनन और भारी उद्योगों के कारण जंगलों की कटाई और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर स्थानीय आबादी में असंतोष की स्थितियां भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
मुड़ें
2000 में एक नए सपने के साथ शुरू हुआ छत्तीसगढ़ आज 2026 में भारत का एक सशक्त, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत राज्य बन चुका है।
उम्मीदें और अवसर
सरकारों ने विकास की मजबूत इमारत तो खड़ी की है और जनता की कई बुनियादी उम्मीदों को पूरा भी किया है, लेकिन आने वाले वर्षों में असली परीक्षा यह होगी कि खनिज संपदा और औद्योगिक विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी समानता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ पहुंचता है। छत्तीसगढ़ का 26वां स्थापना दिवस केवल अतीत के जश्न का नहीं, बल्कि भविष्य के समावेशी विकास का संकल्प लेने का अवसर है।





