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विवाहित पुरुष का वयस्क महिला संग सहमति से ‘लिव इन’ में रहना अपराध नहीं : हाई कोर्ट

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी शाहजहांपुर निवासी अनामिका तथा नेत्रपाल की याचिका पर कोर्ट ने कहा-नैतिकता, सामाजिक अवधारणा कोर्ट को गाइड नहीं कर सकते, इन्हें कानून से अलग रखा जाए।

प्रयागराज

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प्रवक्ता.कॉम 27 मार्च 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि प्रथमदृष्टया किसी विवाहित पुरुष का किसी । वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं है। इस पर उसे किसी अपराध के लिए अभियोजित नहीं किया जा सकता। नैतिकता, सामाजिक अवधारणा और कानून को अलग-अलग रखना होगा।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी शाहजहांपुर निवासी अनामिका तथा नेत्रपाल की याचिका पर कोर्ट ने कहा-नैतिकता, सामाजिक अवधारणा कोर्ट को गाइड नहीं कर सकते, इन्हें कानून से अलग रखा जाए।

याचिका की सुनवाई के दौरान की है। कोर्ट ने जोड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अनामिका के परिवार वालों से कहा है कि वे याचीगण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाएं, न ही उनके घर में घुसें। 18 वर्षीय याचीका कर्ता अनामिका की मां ने एफआइआर दर्ज कराई है कि विवाहित नेत्रपाल उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। चूंकि वह विवाहित पुरुष है इसलिए अन्य महिला के साथ रहने में अपराध का आरोपित हो सकता है।

न्यायालय ने माना

कोर्ट ने दोनों याचीगण के संयुक्त शपथ पत्र को रिकार्ड पर लेने के बाद पुलिस अधीक्षक को निर्देश जारी किया।

यदि कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता है तो सामाजिक राय और नैतिकता, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की कार्रवाई का मार्गदर्शन नहीं करेगी।

लेने के बाद पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे याचीगण की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

शक्तिवाहिनी बनाम यूनियन आफ इंडिया (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया

इस संदर्भ में शक्तिवाहिनी बनाम यूनियन आफ इंडिया (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें पुलिस अधीक्षक को दो वयस्कों की सुरक्षा के लिए विशेष दायित्व सौंपा गया है। राज्य सरकार व शिकायतकर्ता को जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए कोर्ट ने

अगली सुनवाई तिथि आठ अप्रैल नियत की है। साथ ही अनामिका के परिवार वालों को आदेश दिया है कि वे याचीगण के घर में प्रवेश करने या उनसे सीधे या किसी भी इलेक्ट्रानिक माध्यम से संपर्क नहीं करें। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस अधीक्षक सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

याचीका कर्ता ने एसपी को अपने परिवार से जीवन को खतरे की शिकायत की थी। कहा था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से लिव इन में रह रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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