रायपुर, 07 अक्टूबर 2026:
छत्तीसगढ़ में संस्कृत शिक्षा को सुदृढ़ बनाने और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए ठोस कार्ययोजनाएं तैयार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डल द्वारा प्रदेश के प्राच्य संस्कृत विद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्रधानाचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 5 अक्टूबर को आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता विद्यामण्डलम् के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार राजपूत ने की।
बैठक के दौरान संस्कृत के प्रचार-प्रसार को गति देने, समाज में संस्कृत विद्यालयों की भूमिका को प्रभावी बनाने और छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए योजनाएं बनाने पर गहन मंथन हुआ।
प्रमुख बिंदु एवं दिशा-निर्देश
सामाजिक जुड़ाव और सक्रियता:
अध्यक्ष श्री राजेश कुमार राजपूत ने विद्यालय प्रमुखों का आह्वान किया कि वे संस्कृत शिक्षा को जन-जन से जोड़ने और छात्र हित में अधिक सक्रियता के साथ कार्य करें।
दायित्वों का निष्पक्ष निर्वहन:
विद्यामण्डलम् की सदस्य श्रीमती सुमन मुथा ने प्राचार्यों को उनके कर्तव्यों और दायित्वों का निष्पक्षतापूर्वक पालन करने का आग्रह किया।
प्रशासनिक मार्गदर्शन:
सचिव डॉ. विजय खंडेलवाल ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
शासकीय योजनाओं की समीक्षा:
सहायक संचालक (वित्त एवं योजना) श्री अमित शुक्ला ने विद्यार्थियों के लिए संचालित गणवेश, पाठ्यपुस्तक, साइकिल और कम्प्यूटर वितरण योजनाओं की स्थिति से अवगत कराया।
परीक्षा एवं नामांकन प्रक्रिया:
सहायक संचालक (परीक्षा) डॉ. गरिमा ताम्रकार ने आगामी नामांकन एवं परीक्षा संचालन की प्रक्रियाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला।
इस अवसर पर व्याख्याता श्रीमती नम्रता चन्द्राकर, डॉ. व्यासनारायण आर्य, सहायक लेखाधिकारी श्री ए. पी. मिश्रा तथा सहायक ग्रेड-2 श्री वाय. के. चौबे सहित विद्यामण्डल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।






