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पंच तत्व में विलीन हो गए केदार सिंह परिहार छत्तीसगढ़ के जनमानस की स्मृतियों में सदैव रहेंगे जिंदा

रायपुर /मुंगेली/प्रवक्ता.कॉम 31 अगस्त 25

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छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला अंतर्गत ग्राम केसतरा की माटी में जन्मे सुप्रसिद्ध गीतकार एवं कवि केदार सिंह परिहार आज पंचतत्व में विलीन हो गए ।

उनका नश्वर शरीर भले ही इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन जिन अमर गीतों को उन्होंने गाया वो छत्तीसगढ़ के जनमानस के अंतस में सदैव गुंजायमान रहेंगे। मुझे याद है हम सबका बचपन उनकी गीतों की गुनगुनाकर बड़ा हुआ है। किस तरह से उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता और पहुंच को छत्तीसगढ़ के घर घर तक पहुंचा दिया था। मेरे एक परिचित अरुण सिंह चौहान के साथ उन्होंने मिलकर किसान मितान नाम के छत्तीसगढ़ी फिल्म का निर्माण किया ,जिसके गीत उन्होंने गाए।

परिहार ने कई सुप्रसिद्ध गीत लिखे हैं. 1972 में उनका लिखा एक गीत ‘छत्तीसगढ़ ल छांव करे बर मय छानही बन जातेंव’ आज 50 साल बाद भी लोगों की जुबान पर है।

उनका जन्म केशतरा से दो किलोमीटर दूर पलानसरी गांव में 7 मार्च 1952 को एक किसान परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम भागवत सिंह परिहार तथा माता का नाम श्रीमती अंबिका सिंह परिहार है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा नवागढ़ के पास स्थित गाड़ामोर गांव में हुई. इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए मुंगेली आ गए. मुंगेली के एनएसजी कॉलेज से उन्होंने बीए किया. फिर जांजगीर कॉलेज में एलएलबी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन किन्हीं पारिवारिक कारणों की वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी.

निधन की खबर से स्तब्ध – स्वर्गीय केदार सिंह परिहार के स्वास्थ्य के विषय में मेरे मित्र एवं परिवारिक भाइयों के माध्यम से जानकारी मिलते रहती थी । स्वास्थ्य ठीक नहीं था, आज उनके निधन की खबर ने छत्तीसगढ़ के उनके प्रशंसक और शुभचिंतकों को स्तब्ध कर दिया ।

मुख्य मंत्री ने , विधानसभा अध्यक्ष , वित्त मंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर दी श्रद्धांजलि –

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार श्री केदार सिंह परिहार जी के देवलोक गमन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोक-संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

डॉ रमन सिंह ने लिखा प्रसिद्ध साहित्यकार और छत्तीसगढ़ के अद्भुत कवि श्री केदार सिंह परिहार जी के देहांत से मन स्तब्ध है। श्री केदार जी ने लोकबोली में जनभावनाओं को स्वर दिए थे, “छत्तीसगढ़ ल छांव करे बर मंय छानही बन जातेंव ” जैसी भावविभोर करने वाली पंक्तियां रचकर केदार जी ने छत्तीसगढ़ की माटी के लाल को भाव पूर्ण श्रद्धांजलि।

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