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आज समस्त विश्व भारत को विश्वगुरु के रूप में नेतृत्व प्रदान करने के लिए आशा की दृष्टि से देख रहा है– मोहन भागवत

देहरादून 22 फरवरी 2026

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आरएसएस के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की कड़ी में रविवार को गढ़ी कैंट स्थित कल्चरल सेंटर में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहे। संविधान में आरक्षण के तय प्रावधानों का पालन हो। सामाजिक चेतना का असर है कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके हैं, वे अब खुद इसका लाभछोड़ने लगे हैं।

भागवत ने कहा कि जब तक सामाजिक विषमता है, तब तक भेदभाव है। शहरों में अलग तरीके से अस्पृश्यता के मामले देखे जाते हैं। गांवों में अलग तरीके से भेदभाव की बात सामने आती है। स्वतंत्रता, समानता का सभी को अधिकार है। इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है। संघ इस दिशा में लगातार सक्रिय है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। उन्होंने कहा, हिंदू शास्त्रों में भी सामाजिक कुरितियों और भेदभाव की कोई जगह नहीं है।

आरएसएस सर संघचालक ने कहा कि राष्ट्र को इतना मजबूत बनाया जाए कि

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को देहरादून के हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम संघ यात्रा नए क्षितिज, नई दिशाएं’ में हिस्सा लिया। पेट्र

भारत में सभी लोगों का डीएनए एक

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश के सभी लोगों का डीएनए एक ही है। ये बात वैज्ञानिक प्रमाणित है। उन्होंने कहा कि खानपान, पूजा, रीति रिवाज भले ही अलग अलग हो, लेकिन इन सबसे ऊपर सभी को आपस में एक सूत्र में जोड़ना ही हिंदुत्य है। उन्होंने कहा कि अखंड भारत के क्षेत्र से जुड़े सभी लोग, भले ही वे किसी भी धर्म के हों, वे आज भी वंशावली देखते हैं।

कोई भी हमें टैरिफ का डर न दिखा पाए। जब राष्ट्र सुरक्षित और प्रतिष्ठित होता है, तो विश्व में भी हम सुरक्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि अपने स्वदेशी सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा। तभी हम विकसित राष्ट्र, विश्व गुरु बनेंगे। कहा कि आने वाले समय में विश्व का हर रास्ता भारत से ही होकर निकलेगा।

अब कटने और बंटने के दिन गए

वाले यूसीसी लागू करने से देश में 1947 हालात पैदा होने के सवाल पर संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि अब कटने और बंटने के दिन लग गए हैं। अब देश में कभी भी 1947 वाले हालात पैदा नहीं हो सकते। जो गलती उस दौर में हुई, वो अब न होगी। यूसीसी सभी के लिए

देश की आजादी में संघ की अहम भूमिका

भागवत ने कहा कि संघ का देश की आजादी में अहम योगदान है। आरएसएस के संस्थापक डॉ, केशव बलिराम हेडगेवार कभी भी अंग्रेजों के आगे नहीं झुके। वे पश्चिम भारत में क्रांतिकारी समिति के कोर कमेटी सदस्य रहे। राजद्रोह का केस उन पर लगा। रासबिहारी बोस, वीर सावरकर, बंदशेखर आजाद, भगत सिंह, अरविंद बोस के साथ मुहिम में रहे। बाद में उन्होंने गुलामी जैसे हालात पैदा ही न हो, इसके लिए संघ की स्थापना की।

संघ का नियंत्रण नहीं

संघ प्रमुख बोले, लोगों को गलतफहमी है कि संघ भाजपा को नियंत्रित करता है। संघ को सत्ता नहीं चाहिए। भले ही स्वयं सेवक सत्ता में हों। वहां जाने वाले स्वयंसेवक संघ से त्यागपत्र देकर जाते हैं। वे बिना संघ के चल सकते हैं।

बेहतर है। भागवत ने कहा कि डेमोग्राफी में बदलाव, असंतुलन से राष्ट्र टूट जाते हैं। डेमोग्राफी बैलेंस बनाने की जरूरत है। इसके लिए तीन बच्चों का आंकडा सेफ है। कहा कि जनसंख्या हमारे लिए बोझ न बने, बल्कि इसका बेहतर

“भागवत ने कहा कि 2000 वर्षों की दीर्घ यात्रा के बाद आज समस्त विश्व भारत को विश्वगुरु के रूप में नेतृत्व प्रदान करने के लिए आशा की दृष्टि से देख रहा है। यह भारत के सनातन ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उपस्थित सभी जनों से भारत को परम वैभव की ओर ले जाने का संकल्प लेने तथा संघ एवं उसकी गतिविधियों से जुड़कर समाज और देश को सशक्त बनाने का आह्वान किया।

द्वितीय सत्र में भागवत जी ने सभागार में उपस्थित समाज के विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रबुद्धजनों तथा युवाओं के जिज्ञासा सत्र को संबोधित किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए जिज्ञासुओं ने संघ के स्वरूप, कार्यशैली एवं राष्ट्र निर्माण में भूमिका से संबंधित अनेक प्रश्न रखे, जिनका भागवत जी ने अत्यंत संतोषजनक, तार्किक एवं सहज भाव से उत्तर दिया। यह सत्र उपस्थित जनों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा।

आज के इस कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों में अखिल भारतीय सेवा प्रमुख राजकुमार, क्षेत्र कार्यवाह प्रमोद , क्षेत्र प्रचारक महेंद्र, प्रचारक प्रमुख जगदीश क्षेत्र प्रचार प्रमुख पद्म क्षेत्र सेवा प्रमुख धनीराम जी, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र, सह प्रांत प्रचारक चंद्रशेखर जी तथा सहित समाज के सभी वर्गों के गणमान्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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