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रायपुर में लोगों के गायब होने की वायरल खबर की सच्चाई – पुलिस प्रशासन ने दी सफाई, जानें क्या है पूरा मामला !

रायपुर से लोगों के अचानक गायब होने का दावा करने वाली खबरें अफवाह साबित हुई हैं। यह किसी नई आपराधिक घटना का नतीजा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पुराने पेंडिंग मामलों को औपचारिक एफआईआर में बदलने की प्रशासनिक प्रक्रिया है।


​रायपुर प्रवक्ता .कॉम 11 अक्टूबर 26
राजधानी रायपुर से पिछले कुछ दिनों से लोगों के अचानक गायब होने की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस सनसनीखेज दावे के बाद से शहर के नागरिकों में चिंता और दहशत का माहौल बन गया है। हालांकि, जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की गई और पुलिस के आधिकारिक पक्षों को खंगाला गया, तो एक चौंकाने वाली और पूरी तरह अलग तस्वीर सामने आई है।
​आइए जानते हैं इस वायरल खबर की जमीनी सच्चाई क्या है और इसके पीछे के असली कारण क्या हैं।
​क्या है पूरी खबर और सच्चाई?
​पुलिस सूत्रों और प्रशासनिक बयानों के अनुसार, रायपुर में किसी बड़े अपहरण गिरोह के सक्रिय होने या अचानक रातों-रात लोगों के गायब होने जैसी खबरें पूरी तरह भ्रामक और अफवाह हैं।
​वास्तविक स्थिति यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के एक नए निर्देश और पुलिस की कानूनी कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।
​सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का असर:

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देश की सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिए हैं कि देश भर में जितने भी पुराने ‘गुम इंसान’ (Missing Persons) के मामले लम्बित पड़े हैं, उन सभी मामलों में नए सिरे से औपचारिक एफआईआर दर्ज की जाए।
​एक साथ दर्ज हुई इतनी एफआईआर:

इसी कानूनी प्रक्रिया के पालन के तहत रायपुर पुलिस ने पिछले कुछ हफ्तों में दर्ज पुराने और पेंडिंग मामलों को औपचारिक रूप से एफआईआर में बदला। महज कुछ दिनों के भीतर 132 से 159 के करीब एफआईआर एक साथ सिस्टम में दर्ज होने से कुल आंकड़े अचानक बढ़ गए, जिसे कुछ लोगों ने गलत रूप से ‘शहर से लोगों के गायब होने’ की अफवाह के रूप में फैला दिया।
​यह रातों-रात की घटना नहीं:

ये वे लोग हैं जो पिछले कुछ महीनों में पारिवारिक, व्यक्तिगत या अन्य कारणों से घर से गए थे और जिनकी तलाश पहले सामान्य गुमशुदगी (सनहा) के तहत की जा रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत इन्हें एफआईआर का रूप दिया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के आंकड़े
​पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन मामलों में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं:
​दर्ज मामलों में एक बड़ी संख्या महिलाओं (लगभग 78) और नाबालिग बच्चों की है।
​रायपुर कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले प्रमुख थानों जैसे टिकरापारा, उरला, खमतराई और गुढियारी आदि क्षेत्रों में ऐसे पेंडिंग मामले सबसे अधिक संख्या में दर्ज किए गए हैं।
​गुमशुदगी के मुख्य कारण
​पुलिस की शुरुआती और पुरानी जांच रिपोर्ट बताती है कि इन मामलों के पीछे कोई आपराधिक साजिश या गैंगवार नहीं है, बल्कि इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित सामाजिक और पारिवारिक कारण छिपे हैं:
​पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद और पारिवारिक कलह।
​आर्थिक तंगी, बेरोजगारी या घर की जिम्मेदारियों का तनाव।
​किशोर-किशोदियों द्वारा बिना बताए घर छोड़ना (अक्सर प्रेम प्रसंग या परीक्षा के तनाव के चलते)।
​बुजुर्गों में भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) के कारण रास्ता भटक जाना।
पुलिस प्रशासन की अपील
​रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही इसे शेयर करें। पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है और सभी मामलों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तकनीकी और जमीनी स्तर पर लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
​महज अफवाह के अलावा कुछ नहीं

रायपुर से लोगों के अचानक गायब होने का दावा करने वाली खबरें अफवाह साबित हुई हैं। यह किसी नई आपराधिक घटना का नतीजा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पुराने पेंडिंग मामलों को औपचारिक एफआईआर में बदलने की प्रशासनिक प्रक्रिया है।
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