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शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री सचिव और DPI को सौंपा ज्ञापन: भौतिक-रसायन व्याख्याताओं ने उठाई हाई स्कूल विज्ञान में समायोजन की मांग

छत्तीसगढ़ में 15 से 24 वर्षों से कार्यरत स्थानांतरित शिक्षकों ने पदोन्नति विसंगतियों और 2008 के सेटअप में सुधार को लेकर उठाई आवाज; लैब शिक्षकों को अध्यापन से मुक्त करने की भी मांग

​रायपुर प्रवक्ता. कॉम 2 अक्टूबर 2026

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पदोन्नत, स्थानांतरित और पदस्थापना की विसंगतियों को दूर करने तथा छात्र हित में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर के शिक्षकों एवं संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी अधिकारी स्थानांतरित संगठन और छत्तीसगढ़ शिक्षक कांग्रेस के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री के सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को ज्ञापन सौंपकर अपनी विभिन्न मांगों के शीघ्र निराकरण की अपील की है।

​प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रांत अध्यक्ष लालबहादुर साहू, रायपुर संभाग उपाध्यक्ष भुवनेश्वर प्रताप, डी. के. घोसले, महादेव साहू, बी. एल. मंगेशकर, सरोज यादव एवं ए. के. मंडावी ने किया। उनके साथ राज्यभर के भौतिक, रसायन के व्याख्याता, प्राचार्य और उच्च योग्यताधारी बेरोजगार युवा भी शामिल थे।

​15 से 24 साल पुराने शिक्षकों को कनिष्ठ बनाने का विरोध

​संगठन ने राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरित कर्मचारियों के लिए लागू की गई नीतियों पर गंभीर आपत्ति जताई है। प्रतिनिधियों ने कहा कि 1998, 2005 और 2008 बैच के अनुभवी शिक्षक, जो पिछले 15 से 24 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, गलत नीतियों के कारण वर्ष 2016 में नियुक्त कर्मचारियों से कनिष्ठ (जूनियर) होते जा रहे हैं। कई शिक्षक बिना किसी पदोन्नति के एक ही पद पर सेवानिवृत्त होने की कगार पर हैं। संगठन ने मांग की है कि GAD के नियमों के तहत प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता का समायोजन करते हुए स्थानांतरित शिक्षकों को प्राचार्य, व्याख्याता और प्रधानपाठक के पदों पर पदोन्नति का लाभ दिया जाए।

​हाई स्कूल विज्ञान में भौतिक, रसायन और बायो तीनों के पद सृजित हों

​प्रतिनिधिमंडल ने 2008 के हाई स्कूल सेटअप में आंशिक संशोधन की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि NCERT/SCERT पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 9वीं और 10वीं के विज्ञान में भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान (बायो) तीन अलग-अलग भाग हैं। वर्तमान में केवल बायो व्याख्याताओं को प्राथमिकता मिलने से भौतिक और रसायन के विशेषज्ञ शिक्षकों को अवसर नहीं मिल रहा है।

​शिक्षकों का तर्क है कि भौतिक और रसायन के व्याख्याता विज्ञान के साथ-साथ गणित अध्यापन में भी सक्षम हैं, जबकि बायो विशेषज्ञ गणित नहीं पढ़ा पाते। अतः गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों के हित में हाई स्कूल विज्ञान सेटअप में तीनों विषयों की नई नियुक्ति व पदोन्नति काउंसलिंग में स्पष्ट प्रावधान किया जाए।

​विषयवार अध्यापन का कड़ाई से पालन कराने की मांग

​ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि 2008 सेटअप के तहत जिस विषय विशेषज्ञ की नियुक्ति जिस विषय के लिए हुई है, उनसे उसी विषय का अध्यापन कराया जाए। कई संस्थाओं में अन्य विषयों के शिक्षकों पर गैर-विषय अध्यापन का बोझ डाला जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

​लैब शिक्षकों के लिए नई नीति और प्रायोगिक कालखंड की गणना

​शिक्षकों ने प्रयोगशाला शिक्षण को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:

अध्यापन से मुक्ति

लैब शिक्षकों को अतिरिक्त अध्यापन व गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त रखा जाए, ताकि वे प्रयोगशालाओं का नियमित संचालन और टीचिंग मेथाडोलॉजी का सुचारू प्रबंधन कर सकें।

गणित संकाय को प्राथमिकता

भविष्य में लैब शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गणित संकाय के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए।

प्रायोगिक कार्य की कालखंड में गणना

विज्ञान संकाय के शिक्षकों के कार्यभार को संतुलित करने के लिए प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) कक्षाओं को अनिवार्य रूप से नियमित कालखंड (Period) की गणना में शामिल किया जाए।

​न्यायालय के आदेश का दिया हवाला

​संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि विषय सेटअप के मामले को लेकर उच्च न्यायालय में दायर रिट पिटीशन (WP No. 1313/2026) के तहत कोर्ट ऑर्डर और लीगल नोटिस भी DPI को प्रेषित किया जा चुका है।

​प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि राज्य की वर्तमान सरकार शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और शिक्षकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इन गैर-वित्तीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।

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