पीएफ पर मिलता रहेगा 8.25% ब्याज, जून से सितंबर के बीच खातों में आएगा पैसा
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के इस फैसले पर अब वित्त मंत्रालय की मुहर लगेगी इसके बाद कर्मचारियों के खातों में पैसा क्रेडिट हो जाएगा
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एजेंसी नई दिल्ली प्रवक्ता.कॉम 5 मार्च 2026
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी पोएफ पर 8.25% की दर से ही व्याज मिलता रहेगा। सरकार ने ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है। सेंट्रल बेर्ड ऑफ ट्रस्टीज के इस फैसले पर अब वित्त मंत्रालय की मुहर लगेगी, जिसके बाद कर्मचारियों के खातों में पैसा क्रेडिट होगा। आम तौर पर सीबीटी की घोषणा के कुछ नहीनों बाद ब्याज की रकम खातों में जमा की जाती है। पिछले रिकॉर्ड को देखें तो यह पैसा हर साल जून से सितंबा के बीच क्रेडिट होता है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2024-25 का ब्याज जुलाई 2025 में खातों में डाला गया था। हालांकि, इसकी कोई तय तारीख नहीं होती, इसलिए सब्सक्राइबर्स को समय-समय पर अपना बैलेंस चेक करते रहना चाहिए।
देरी होने पर भी नहीं होगा ब्याज का नुकसान
अक्रूर सब्सक्राइबर्स को चिता रहती है कि अगर ब्याज केडिट होने में देरी होती है तो क्या उन्हें नुकसान होग ईपीएफओ ने साफ किय है कि सयाज क्रेडिट होने में देरी से मेंबर्स को कोड वित्तीय नुकसन नहीं होता है। नवंबर 2024 में बदले गाए नियमों के मुताचेक, जब सेटलमेंट की तारीख तक का पूरा ब्याज दिया जाता है, जबके पहले केवल पिछले महीने एफका ही व्याज विপেয়া যা।
EPFO
‘पासबुक लाइट’ से चेक करें अपना बैलेंस
ईपीएफओ ने बैलेंस वेक करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए
‘पासबूक लाइट फीचर शुरू किया है इपीएफओं का कबसाइट पर जाए
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पिछले 5 सालों में की ब्याज दरें
2024-25:8.25% 2023-24:8 25% 2022-23:3.15% 2021-22:8.10% 2023-21:8.50%
1952 में 3% ब्याज से शुरुआत हुई थी
1952 में पीएफ पर ब्याज पर केवल उ थी। इसके बाद इसमें बढ़ोतरी होती गई। 1972 में यह 6% और 1984 में यह पहली बार 10% के ऊपर पहुंच गई। पीएफ धारकों को 1989 से 1999 के दौराण 12% ভাবে লিগের যা।
इसके बाद ब्याज दर में गिरावट आनी शुरू हो गई। 1999 के बाद ब्याज दर वामी भी 10% के करीब नहीं पहुंची। 2001 के बाद से यह 9500% के जीये ही रही
है। पिछले सत सालों से यह 35% या उससे कम रही है।
फाइनेंशियल ईयर के आखिर में तय होती है ब्याज दर
पीएफ में ब्याज दर के फैसले के लिए सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी की बैठक होती है। यह इस फाइनेंशियल ईयर में जमा हुए पैतों के बारे में हिसाब देती है। इसके बाद सीबीटी की बैठक होती है। सीबीटी के निर्णय के बाद वित्त मंत्रालय सहमति के बाद व्याज दर लागू करता है। ब्याज दर पर फैसला फाइनेंशियल ईयर के आखिर में होता है।
सेंसेक्स 1123 अंक विरकर 79 116 पर और निफ्टी 385 अंक विरकर 24 480 के स्तर पर आया।






