नेशनल हाईवे 130 के निर्माण के दौरान 50 से 70 साल पुराने 1028 अर्जुन वृक्ष वन विभाग ने काट डाले एसडीओ ने माना कई पेड़ बेवजह काटे गए एवज में एक भी पेड़ नहीं लगाए
वन विभाग पंडरिया द्वारा 14 अक्टूबर 2024 को पौधे लगाने के लिए विभाग प्रमुख को प्रस्ताव भेजा था,जिसके बाद 21 जुलाई 2025 को पुनः एक करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था।लेकिन विभाग प्रमुख द्वारा स्वीकृति नहीं मिली,जिसके चलते क्षेत्र में क्षतिपूर्ति के रूप में पौधारोपण नहीं हो पाया है।
कबीरधाम/ पंडरिया/ प्रवक्ता. कॉम 20 मार्च 2026
पंडरिया-ब्लाक अंतर्गत मुंगेली से पोंडी के बीच पंडरिया, कवर्धा,वन मंडल अंतर्गत नेशनल हाइवे सड़क निर्माण के लिए सन 2023 में 1028 पेड़ काटे गए थे।काटे गए पेड़ों के एवज में 10 गुना अर्थात 10280 पेड़ वन विभाग को लगाने थे,किन्तु आज करीब तीन वर्ष बाद भी एक भी पेड़ नहीं लगाए गए हैं।वन विभाग को पेड़ लगाने के लिए पैसे मिल चुके हैं।लेकिन पेड़ लगाने का कार्य नहीं किया गया।मुंगेली से पंडरिया व पोंडी के बीच सड़कों पर राहगीरों के लिए कहीं छाया नहीं है।राहगीरों को इस बीच तेज धूप में सफर करना पड़ता है।
भेजा गया था प्रस्ताव–

पेड़ों की कटाई के बाद वन मंडल पंडरिया द्वारा मुख्य वन संरक्षक रायपुर को पौधे लगाने एक करोड़ के प्रस्ताव भेजे गए थे,किंतु विभाग द्वारा स्वीकृति नहीं दी गई।वन विभाग पंडरिया द्वारा 14 अक्टूबर 2024 को पौधे लगाने के लिए विभाग प्रमुख को प्रस्ताव भेजा था,जिसके बाद 21 जुलाई 2025 को पुनः एक करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था।लेकिन विभाग प्रमुख द्वारा स्वीकृति नहीं मिली,जिसके चलते क्षेत्र में क्षतिपूर्ति के रूप में पौधारोपण नहीं हो पाया है।
“नेशनल हाईवे के मांग के आधार पर वन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई की गई थी।कुछ पौधों को काटने की जरूरत नहीं थी।क्षतिपूर्ति पौधारोपण के लिए शासन व मुख्य कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया था,स्वीकृति नहीं मिलने के कारण पौधारोपण नहीं हो पाया है”
सुयशधर दिवान
एसडीओ,वन विभाग पंडरिया
एस डी ओ फॉरेस्ट ने माना गलती हुई
बेवजह काटे गए पेड़-वन विभाग सहित नेशनल हाईवे ने पेड़ों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जिसके चलते 50 वर्ष से अधिक पुराने अर्जुन के पेड़ को काट दिया गया।सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ काटे गए थे।लेकिन पुरानी व नई सड़क की चौडाई में ज्यादा अंतर नहीं है,नए सड़क में केवल ऊंचाई का ही अन्तर नजर आ रहा है।अर्थात सड़क निर्माण के लिए अधिकांश पेड़ो की काटने की जरूरत नहीं थी।अधिकतर पेड़ों को बेवजह काट दिया गया है।
ठूंठ वहीं हैं, सड़क बन गया,फिर काटने की जरूरत क्यों पड़ी-सड़क बनाने के लिए जिन पेड़ों को काटा गया था,उनके ठूंठ अभी तक लगे हुए हैं।सड़क किनारे लगे अर्जुन के पेड़ को सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए काटा गया था। जिसके तना व शाखाओं को काट कर हटा दिया गया है,किन्तु ठूंठ वहीं हैं।जब सड़क सड़क बनाने के लिए ठूंठ को हटाने की जरूरत नहीं पड़ी तो पेड़ को क्यों काट दिया गया। क्या केवल पेड़ की शाखाएं ही सड़क निर्माण में रुकावट थी।इसी तरह कई पेड़ अभी नहीं कटे हैं।किन्तु सड़क निर्माण हो चुका है।पेड़ सड़क के साइड सोल्डर को छू रही है,इसीलिए काटने की जरूरत नहीं दिखाई पड़ रही है। अधिकतर काटे गए पेड़ सड़क से इसी दूरी पर लगे थे,जो बेवजह काट दिए गए।सड़क को देखकर लगता है कि वन विभाग व नेशनल हाईवे में तालमेल के आभाव में पेड़ अधिकतर पेड़ बेवजह काट दिए गए।नेशनल हाईवे ने बेवजह इन पेड़ों को कटवा दिया जिन्हें काटने की कोई जरूरत नहीं थी।इसकी जांच होनी चाहिए कि वर्षो पुराने पेड़ बेवजह क्यों काट दिया गया।






