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‘पदोन्नति में तदर्थ सेवा की अनदेखी नहीं कर सकते – हाईकोर्ट

न्यायालय ने यह भी है कि यदि किसी कर्मचारी से कनिष्ठ कर्मचारी को पदोन्नति मिल चुकी है, तो उसे भी उसी तिथि से पदोन्नति का अधिकार है, भले ही उसकी सेवा का नियमितीकरण बाद में हुआ हो।

रायपुर, प्रवक्ता .कॉम 23 मार्च 2026

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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने एक निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया विधिसम्मत रही हो और कर्मचारी लगातार सेवा में रहा हो, तो तदर्थ सेवा को भी पदोन्नति के लिए गिना जाएगा। न्यायालय ने यह भी है कि यदि किसी कर्मचारी से कनिष्ठ कर्मचारी को पदोन्नति मिल चुकी है, तो उसे भी उसी तिथि से पदोन्नति का अधिकार है, भले ही उसकी सेवा का नियमितीकरण बाद में हुआ हो।

राज्य सरकार की दो विशेष अपील खरीज

यह फैसला खंडपीठ ने राज्य सरकार दो विशेष अपीलों को खारिज करते हुए सुनाया है। मूल याची अनिल कुमार और शैलेंद्र सिंह आवास एवं शहरी नियोजन विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। दोनों वर्ष 1986 में जूनियर इंजीनियर के पद पर तदर्थ (एढॉक) नियुक्त हुए थे और बाद में उनकी सेवाएं नियमित की गईं। मामले में विवाद तब उत्पन्न हुआ जब इनके बाद नियुक्ति पाए कर्मचारियों को सहायक अभियंता पद पर 18 जनवरी 1995 से पदोन्नति दे दी गई, जबकि याचियों को इसलाभ से वंचित रखा गया। एकलपीठ ने याचियों के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसे राज्य सरकार ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी।

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