विष्णुदेव सरकार का बड़ा फैसला छत्तीसगढ़ में लागू होगा यूसीसी आठवें वेतन आयोग की चेयर पर्सन और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनेगी कमिटी
रंजना प्रकाश देसाई जो कि केंद्र सरकार द्वारा गठित आठवें वेतन आयोग की चेयरपर्सन हैं उन्हें छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रारूप बनाने वाली समिति का हेड बनाया गया है, अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिए सीएम को किया गया अधिकृत
रायपुर प्रवक्ता कॉम 15 अप्रैल 2026
आज छत्तीसगढ़ सरकार ने केबिनेट की बैठक में यूसीसी कॉमन सिविल कोड) लो लागू करने का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील निर्णय लिया है। सीएम साय की अध्यक्षता में महानदी भवन में आज कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी।
रंजना प्रकाश देसाई जो कि केंद्र सरकार द्वारा गठित आठवें वेतन आयोग की चेयरपर्सन हैं उन्हें छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रारूप बनाने वाली समिति का हेड बनाया गया है–
मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code लागू करने के संबंध में Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया तथा समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया।
मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ में Uniform Civil Code लागू करने के संबंध में Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया तथा समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया।
यूसीसी लागू होने से आएगी समानता
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य के नागरिकों संगठनों एवं विशेषज्ञों से उच्चस्तरीय समिति लेगी सुझाव
इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करेगी। यह समिति वेब पोर्टल के माध्यम से फीडबैक भी आमंत्रित कर सकती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों एवं विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर Uniform Civil Code का प्रारूप तैयार करेगी। यह समिति वेब पोर्टल के माध्यम से फीडबैक भी आमंत्रित कर सकती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके।
कौन हैं रंजना प्रकाश देसाई जानें ?

श्रीमती देसाई का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था। वे 1970 में एल्फिंस्टन कॉलेज मुंबई से कला में स्नातक और 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे 30 जुलाई 1973 को कानूनी पेशे में शामिल हो गयी। 1979 में उन्हें सरकारी अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया। 1986 में निवारक नजरबंदी के मामलों के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। वे 1 नवम्बर 1995 को सरकारी अधिवक्ता, अपीलीय साइड, मुंबई उच्च न्यायालय के पद पर नियुक्त हुई और 15 अप्रैल 1996 को उन्हें मुंबई उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। 13 सितंबर 2011 को उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश के रूप में हुई।






