शिक्षा कर्मी के पद पर किए गए कार्य की गणना नहीं होगी डीपीआई ने पेंशन प्रकरण पर जारी किया स्पष्टीकरण हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी पूर्व सेवा गणना पर विभाग गंभीर नहीं
संविलियन प्रावधानों के अंतर्गत पंचायत/नगरीय निकाय से स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरित शिक्षकों (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय संवर्ग) को शासकीय सेवकों के समान सेवा लाभ और वेतन सुविधाएं निर्धारित नियमों के तहत देय हैं।

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 22 अप्रैल 2026
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी संविलियन आदेश के तहत शिक्षक (एल.बी. संवर्ग) की सेवा अवधि की गणना संविलियन 01 जुलाई 2018 से ही की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी संविलियन आदेश 30 जून 2018 के अनुसार, ऐसे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि 01 जुलाई 2018 को 08 वर्ष या उससे अधिक पूर्ण हो चुकी थी, उन्हें उनकी सहमति के आधार पर 01 जुलाई 2018 से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। उक्त आदेश के प्रावधानों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक (एल.बी. संवर्ग) को देय समस्त सेवा लाभों के लिए सेवा अवधि की गणना संविलियन दिनांक से ही की जाएगी। राज्य शासन शिक्षकों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और पारदर्शिता के साथ सभी प्रावधानों का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है।
पेंशन की पात्रता की गणना में लोक शिक्षण संचालनालय ने तत्कालीन संविलयन निर्देशों का दिया हवाला–
शिक्षक (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय) के संविलियन उपरांत सेवा गणना एवं पेंशन पात्रता के संबंध में उत्पन्न विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों को दूर करते हुए राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस संबंध में सभी प्रावधान नियमानुसार ही लागू किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय शालाओं में कार्यरत शिक्षकों (पंचायत/नगरीय निकाय) की प्रारंभिक नियुक्ति पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत शिक्षाकर्मी के रूप में की गई थी, जो शासकीय कर्मचारी की श्रेणी में शामिल नहीं थे।
संविलियन प्रावधानों के अंतर्गत पंचायत/नगरीय निकाय से स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरित शिक्षकों (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय संवर्ग) को शासकीय सेवकों के समान सेवा लाभ और वेतन सुविधाएं निर्धारित नियमों के तहत देय हैं। छत्तीसगढ़ में प्रमुख संविलियन निर्देश (01 जुलाई 2018) के अनुसार 08 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों का संविलियन किया गया है। 8 वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों के लिए भी संविलियन की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी की गई है, जिसके बाद उन्हें समान लाभ मिल रहे हैं।
पेंशन के लिए के लिए नियमानुसार 10 वर्ष की सेवा जरूरी –
राज्य के प्रचलित सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के अनुसार पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की नियमित शासकीय सेवा तथा उपदान (ग्रेच्युटी) के लिए न्यूनतम 05 वर्ष की सेवा आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में संबंधित शिक्षकों की शासकीय सेवा की गणना 01 जुलाई 2018 से किए जाने के कारण 10 वर्ष की आवश्यक सेवा अवधि 30 जून 2028 को पूर्ण होगी। फलस्वरूप नियमानुसार पेंशन का लाभ उक्त अवधि पूर्ण होने के पश्चात ही प्रदान किया जाना संभव होगा।
उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा निर्धारित सभी सेवा लाभ निर्धारित नियमों एवं संविलियन प्रावधानों के अनुरूप ही दिए जा रहे हैं तथा इस संबंध में किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दिया जाए।
शिक्षक संगठनों को एकजुट होकर लेना होगा निर्णय· लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शासन के जनसंपर्क विभाग के हवाले से बयान जारी कर एक तरह से शिक्षकों के बीच यह संदेश देने का प्रयास है कि संविलयन प्राप्त शिक्षकों के पूर्व सेवा अवधि की गणना नहीं होगी । डीपीआई के बयान से यही प्रतीत होता है कि उन्हें वर्तमान में जो पेंशन मिल रही है। उसमें छत्तीसगढ़ में प्रचलित पेंशन नियम 1976 का पालन किया जा रहा है। जिसके अनुसार पूर्व सेवा की गणना नहीं की जा सकती है।
शिक्षकों के संगठनों को आपस मिलकर मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों की तरह ही मिलकर पूर्व सेवा अवधि की गणना के लिए सरकार से चर्चा करनी होगी ।
हाईकोर्ट ने दिया है पुरानी सेवा को नज़र अंदाज नहीं करने का आदेश –
हाई कोर्ट के निर्देश के प्रमुख बिंदु:सेवा की निरंतरता: संविलियन के नाम पर शिक्षकों के पेंशन अधिकार नहीं छीने जा सकते; 1998-99 की प्रारंभिक नियुक्ति से सेवा की गणना की जानी चाहिए।
नीति में बदलाव: शासन को 10 वर्ष की सेवा अनिवार्यता और पिछली सेवाओं को शामिल करते हुए स्पष्ट व पारदर्शी नियम बनाने का निर्देश दिया गया है।
पेंशन का अधिकार: कोर्ट ने पेंशन को ‘स्थगित वेतन’ (Deferred Salary) माना है, न कि कोई दान।





