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सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: बच्चों की गुमशुदगी पर तुरंत दर्ज होगी FIR, देरी करने पर पुलिस पर गिरेगी गाज

सुप्रीम कोर्ट का यह बेहद महत्वपूर्ण और सख्त आदेश 22 मई 2026 (शुक्रवार) को आया है। ​जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ (Bench) ने देश में लगातार गायब हो रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर यह फैसला सुनाया। ​सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देश में 47,000 बच्चों के अभी भी लापता (Untraced) होने के आंकड़ों पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई

प्रवक्ता.कॉम 23 मई 2026

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​नई दिल्ली:
देश में बच्चों की गुमशुदगी के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी बच्चे के लापता होने की शिकायत मिलने पर बिना किसी देरी के तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।

सुप्रीम कोर्ट का यह बेहद महत्वपूर्ण और सख्त आदेश 22 मई 2026 (शुक्रवार) को आया है।
​जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ (Bench) ने देश में लगातार गायब हो रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर यह फैसला सुनाया।
​सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देश में 47,000 बच्चों के अभी भी लापता (Untraced) होने के आंकड़ों पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि पुलिस अब प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) के नाम पर वक्त बर्बाद नहीं कर सकती और शिकायत मिलते ही तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत अपहरण/तस्करी की धाराओं में FIR दर्ज करना अनिवार्य होगा।

अदालत ने साफ किया है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में ‘प्रारंभिक जांच’ (Preliminary Inquiry) के नाम पर समय बर्बाद नहीं किया जा सकता।
​अदालत के निर्देश की मुख्य बातें:
​तत्काल FIR अनिवार्य: बच्चे के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस को बिना कोई बहाना बनाए तुरंत एफआईआर दर्ज करनी होगी।
​मानव तस्करी का संदेह: कोर्ट ने माना कि लापता होने वाले बच्चों के पीछे अक्सर मानव तस्करी (Human Trafficking) या अपहरण जैसे गंभीर रैकेट का हाथ होता है। इसलिए, पुलिस को तुरंत हरकत में आना जरूरी है।
​लापरवाही पर होगी कार्रवाई: यदि कोई पुलिस अधिकारी शिकायत मिलने के बाद भी FIR दर्ज करने में आनाकानी करता है या देरी करता है, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
​तलाश के लिए विशेष टीमें: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद बच्चों की बरामदगी के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन किया जाए और स्थानीय नेटवर्क को सक्रिय किया जाए।
​कोर्ट ने क्यों लिया यह कड़ा फैसला?
​अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के लापता होने के शुरुआती कुछ घंटे बेहद संवेदनशील होते हैं। अक्सर देखा गया है कि पुलिस शिकायत मिलने के बाद भी ‘बच्चा खुद घर लौट आएगा’ या ‘दोस्त के घर गया होगा’ जैसी बातें कहकर मामला टाल देती है। इस ढीलमढाली की वजह से अपराधी बच्चे को शहर या राज्य से बाहर ले जाने में कामयाब हो जाते हैं।
​”बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पुलिस प्रशासन की सुस्ती किसी मासूम की जिंदगी पर भारी नहीं पड़नी चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट
​जनता के लिए क्या हैं इसके मायने?
​इस फैसले के बाद अब कोई भी थाना क्षेत्र का हवाला देकर या जांच का बहाना बनाकर आपकी शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकता। यदि आपके आस-पास ऐसी कोई घटना होती है, तो आप तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर (1098) पर संपर्क कर सकते हैं और पुलिस कानूनी तौर पर तुरंत FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।

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