लोन रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी पर RBI का बड़ा हंटर; जारी की नई गाइडलाइन, अब तय समय पर ही होगी बात!
गाली-गलौज और रिश्तेदारों को फोन किया तो खैर नहीं, बैंक पर लगेगा जुर्माना; जानिए वसूली का नया नियम
प्रवक्ता. कॉम 24 मई 2026
नई दिल्ली:
लोन न चुका पाने वाले ग्राहकों को डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले रिकवरी एजेंटों पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। RBI ने साफ कर दिया है कि कर्ज वसूलना एक कानूनी कॉन्ट्रैक्ट है, किसी की गरिमा और मानवाधिकारों का हनन नहीं। नए नियमों के उल्लंघन पर अब न सिर्फ एजेंट, बल्कि सीधे बैंक और NBFC (फाइनेंशियल कंपनियां) भी कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे।
कब कर सकते हैं कॉल या विजिट? (कॉल का समय तय)
RBI ने डिजिटल और फिजिकल दोनों तरह के संपर्कों के लिए समय सीमा को बेहद कड़ा कर दिया है:
समय सीमा: रिकवरी एजेंट अब केवल सुबह 8:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे के बीच ही ग्राहक को कॉल कर सकते हैं या उनके घर जा सकते हैं।
देर रात और सुबह पाबंदी:
शाम 7 बजे के बाद और सुबह 8 बजे से पहले कॉल करना, मैसेज (WhatsApp/SMS) भेजना या घर जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऑटोमेटेड (कंप्यूटर जनित) मैसेज भी इस समय के बाद नहीं भेजे जा सकते।
कॉल की सीमा:
नियमों के तहत एक हफ्ते में अधिकतम 3 बार ही कॉल की जा सकती है और घर पर सिर्फ 1 बार विजिट की अनुमति है।
कैसे होगी वसूली की प्रक्रिया?
वसूली की प्रक्रिया अब मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि इन कानूनी चरणों के तहत होगी:
लिखित सूचना अनिवार्य:
एजेंट को भेजने से पहले बैंक को ग्राहक को ईमेल या एसएमएस के जरिए लिखित सूचना देनी होगी, जिसमें एजेंट और उसकी एजेंसी की पूरी जानकारी होगी।
पहचान पत्र और सर्टिफिकेट:
जब भी कोई एजेंट ग्राहक के घर जाएगा, तो उसके पास IIBF (Indian Institute of Banking and Finance) का सर्टिफिकेट, बैंक का अथॉराइजेशन लेटर और एजेंसी का ID कार्ड होना जरूरी है। बिना इसके ग्राहक उसे घर से जाने को कह सकता है।
संवेदनशील मौकों पर रोक:
यदि ग्राहक के घर में कोई बीमारी है, शादी है या किसी की मृत्यु (शोक) हुई है, तो ऐसे संवेदनशील मौकों पर रिकवरी एजेंट न तो कॉल कर सकते हैं और न ही घर जा सकते हैं।
क्या करें और क्या न करें
क्या करना अनिवार्य है क्या करना पूरी तरह प्रतिबंधित है ।
केवल सुबह 8 से शाम 7 बजे के बीच संपर्क करना। गाली-गलौज, धमकी देना या ऊंची आवाज में बात करना।
आने से पहले लिखित सूचना और ID कार्ड दिखाना। रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों या एम्प्लॉयर (ऑफिस) को फोन करना।
ग्राहक की गोपनीयता और प्राइवेसी का सम्मान करना। बिना अनुमति के घर या ऑफिस के अंदर जबरन घुसना (क्रिमिनल ट्रेसपास)।
शिकायत मिलने पर तय समय में समाधान करना। फर्जी पुलिस यूनिफॉर्म पहनना या फर्जी कोर्ट समन दिखाकर डराना।
सबसे बड़ा बदलाव
: अब बैंक यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि “यह हरकत थर्ड-पार्टी रिकवरी एजेंसी ने की है।” अगर कोई एजेंट बदतमीजी करता है, तो उसके लिए सीधे बैंक को जिम्मेदार माना जाएगा। ग्राहक की शिकायत पर जांच पूरी होने तक बैंक की रिकवरी प्रक्रिया को अस्थाई रूप से रोका भी जा सकता है।
पीड़ित ग्राहक क्या करें?
अगर कोई एजेंट इन नियमों को तोड़ता है, तो ग्राहक तुरंत उसकी कॉल रिकॉर्डिंग या वीडियो बनाएं। सबसे पहले बैंक के नोडल ऑफिसर से शिकायत करें। अगर 30 दिनों में समाधान नहीं मिलता, तो RBI के बैंकिंग लोकपाल (Ombudsman) या नजदीकी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS 2024) के तहत ‘क्रिमिनल इंटिमिडेशन’ या ‘क्रिमिनल ट्रेसपास’ का मामला दर्ज करा सकते हैं।






