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मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी उठी मांग: ट्रांसफर से बैन हटाकर नई पारदर्शी नीति लाये सरकार


रायपुर प्रवक्ता .कॉम 24 मई 2026
​पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति 2026 को मंजूरी मिलने के बाद अब छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेश में लंबे समय से ट्रांसफर पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाए और एक पारदर्शी, व्यापक ट्रांसफर पॉलिसी लागू की जाए।
​कर्मचारी नेताओं का कहना है कि स्थानांतरण नीति न होने के कारण हजारों कर्मचारी सालों से एक ही जगह पर डटे हैं, जिससे न केवल उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ रहा है, बल्कि प्रशासनिक कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है।
​मांग के पीछे मुख्य कारण और कर्मचारियों के तर्क
​कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखते हुए कई अहम बिंदु रेखांकित किए हैं:
​पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां:

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गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने वालों और महिला कर्मचारियों को गृह जिले या सुविधानुसार तबादला न मिलने से भारी मानसिक और आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

पति पत्नी नीति

: संगठन चाहते हैं कि नौकरीपेशा पति-पत्नी को एक ही शहर या जिले में पदस्थापना का अवसर मिले, जैसा कि पड़ोसी राज्यों की नीतियों में विशेष प्रावधान के तहत किया जाता है।
​पिछली नीति की विसंगतियां:

पिछले वर्ष (2025) में जो संक्षिप्त ट्रांसफर विंडो खोली गई थी, उसमें शिक्षा, पुलिस, और आबकारी जैसे बड़े विभागों के करीब 3.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया था। कर्मचारी इस बार चाहते हैं कि नई नीति में सभी विभागों को समान अवसर मिले।
​कर्मचारी संगठन का बयान:
“मध्यप्रदेश सरकार ने महिला कर्मचारियों और गंभीर रूप से बीमार स्टाफ को ध्यान में रखकर मानवीय आधार पर नई तबादला नीति जारी की है। छत्तीसगढ़ सरकार को भी बिना किसी देरी के समन्वय से अलग हटकर एक खुली और पारदर्शी ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लानी चाहिए।”
​मध्यप्रदेश की नई नीति जिसने छत्तीसगढ़ में सुलगाई ‘चिंगारी’
​हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई ट्रांसफर पॉलिसी के कुछ मुख्य बिंदु छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर उभरे हैं:
​महिला एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्राथमिकता: अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा महिलाओं और जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम का समय बचा है, उन्हें गृह जिले में पदस्थापना दी जा रही है।
पारदर्शिता: ऑनलाइन माध्यम से आवेदनों का निपटारा और निर्धारित समय-सीमा (जैसे 15 जून तक) के भीतर पूरी प्रक्रिया को अंजाम देना।
​सीमित प्रतिशत: विभागों में प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर ट्रांसफर के लिए कर्मचारियों की संख्या के अनुसार (5% से 20% तक) कोटा तय करना।
​आगे क्या? साय सरकार पर टिकी नजरें
​छत्तीसगढ़ में फिलहाल ट्रांसफर पर सामान्य प्रतिबंध लागू है । मुख्यमंत्री समन्वय के अनुमोदन के बाद ही तबादले किए जाते हैं। कर्मचारी संगठनों की इस मुखर मांग के बाद अब गेंद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के पाले में है।
​आने वाले दिनों में यदि सरकार इस पर विचार करती है, तो मानसून सत्र से पहले या उसके दौरान कर्मचारियों को बड़ी राहत की घोषणा देखने को मिल सकती है।

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