वोटर लिस्ट री-वेरिफिकेशन (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चुनाव आयोग की ताकत बरकरार
कोर्ट ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून (RPA) के तहत चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए ऐसा विशेष अभियान चलाने का पूरा हक है।
नई दिल्ली
प्रवक्ता.कॉम 27 मई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आज देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाता सूची (Electoral Roll) की शुद्धता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) के उस फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है, जिसके तहत राज्यों में वोटर लिस्ट को साफ करने और फर्जी वोटरों को हटाने के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान चलाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने पिछले साल बिहार से इस विशेष अभियान (SIR) की शुरुआत की थी, जिसे बाद में पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी लागू किया गया। इसके तहत वोटरों से उनकी नागरिकता और निवास से जुड़े पुराने दस्तावेज मांगे जा रहे थे। याचिकाकर्ताओं ने इसे कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि चुनाव आयोग इसके जरिए NRC जैसा नागरिकता का टेस्ट ले रहा है और इससे गरीब व प्रवासी नागरिक वोटिंग के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
आज फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने याचिकाएं खारिज कर दीं और मुख्य बातें कहीं:
चुनाव आयोग का अधिकार: कोर्ट ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून (RPA) के तहत चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए ऐसा विशेष अभियान चलाने का पूरा हक है।
NRC से तुलना गलत: कोर्ट ने माना कि यह प्रक्रिया किसी को प्रताड़ित करने के लिए नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है। सिर्फ इसलिए इसे अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य रूटीन संशोधन से अलग है।
नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच भी दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटा तो सकता है, लेकिन वह किसी की नागरिकता का अंतिम फैसला नहीं कर सकता।






