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राज्य शासन को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: बिलासपुर DEO के नियुक्ति आदेश पर रोक, नियम विरुद्ध नियुक्तियों पर कोर्ट सख्त प्रवक्ता.कॉम ने 12 जून को प्रमुखता से इस विषय को उठाया था

बिलासपुर जिले में याचिकाकर्ता प्रिंसिपल्स सहित 100 से अधिक ऐसे प्रिंसिपल्स कार्यरत हैं, जो 18 वर्ष या उससे अधिक सीनियर हैं। ​जिस अधिकारी को प्रभारी DEO की कमान सौंप दी गई, उन्हें मात्र 6 महीने पहले ही शिक्षक (LB) से प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया था। ​राज्य शासन ने अपने ही तय मापदंडों की खुली अवहेलना करते हुए एक बेहद जूनियर अधिकारी को सीनियरों के सिर पर बैठा दिया।

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प्रवक्ता .कॉम| बिलासपुर

10 जुलाई 26

​छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग को एक बड़ा झटका देते हुए बिलासपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के प्रभारी नियुक्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि नियम विरुद्ध और सीनियरिटी को ताक पर रखकर आदेश जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

​जूनियर को बना दिया था बॉस, 18 साल सीनियर प्रिंसिपल्स ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

​मामले के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर प्राचार्य (LB) रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले के प्रभारी DEO के पद पर पदस्थ किया था। इस आदेश के खिलाफ प्रिंसिपल राघवेंद्र गौराहा और कामेश्वर बैरागी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

​याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता जितेंद्र पाली ने कोर्ट को बताया कि:

बिलासपुर जिले में याचिकाकर्ता प्रिंसिपल्स सहित 100 से अधिक ऐसे प्रिंसिपल्स हैं, जो 18 वर्ष या उससे अधिक सीनियर हैं।

जिस शिक्षक (LB) को प्रभारी DEO बनाया गया है, उन्हें मात्र 6 महीने पहले ही शिक्षक से प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया था।

राज्य शासन ने अपने ही नियमों और मापदंडों की खुली अवहेलना करते हुए एक बेहद कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारी को वरिष्ठों के ऊपर पदस्थ कर दिया।

12 जून को ही इस इस नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताते हुए खबर चलाई थी

​’प्रवक्ता.कॉम’ द्वारा 12 जून को ही इस गड़बड़ी को उजागर करने और अब हाईकोर्ट द्वारा इस नियुक्ति पर रोक लगाए जाने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है। शिक्षा जगत का साफ कहना है कि सीनियरिटी की अनदेखी कर चहेतों को उपकृत करने वाले उच्च अधिकारियों पर अब कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे त्रुटिपूर्ण आदेश जारी करने वाले अफसरों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

ताकि कोर्ट न जाना पड़े: पारदर्शी SOP की सख्त जरूरत

​इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक गलियारों में यह मांग तेजी से उठ रही है कि सरकार को इस तरह की महत्वपूर्ण नियुक्तियों और प्रभार सौंपने के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करनी चाहिए।

वरिष्ठता सूची (Seniority List) का हो पालन: SOP में यह अनिवार्य होना चाहिए कि किसी भी प्रशासनिक पद का प्रभार देते समय वरिष्ठता सूची के टॉप अधिकारियों के नामों पर ही पहले विचार किया जाए।

मनमानी पर लगेगी रोक: यदि सरकार एक पारदर्शी SOP बना देती है, तो अधिकारियों की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद और मनमानी खत्म होगी और योग्य व सीनियर अधिकारियों को उनका हक मिलेगा।

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