मानसून सत्र के पहले दिन कर्मचारियों का हल्लाबोल: वित्त मंत्री ओपी चौधरी को याद दिलाया बजट भाषण, पूछा- ‘100 करोड़ के प्रावधान के बाद भी कब मिलेगा कैशलेस इलाज?’

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 13 जुलाई 2026
(विजय सिंह)
विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है। सत्र की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही सरकारी कर्मचारियों ने अपनी सेहत और हक को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले बजट सत्र में की गई घोषणा के महीनों बाद भी धरातल पर कुछ न दिखने से आक्रोशित कर्मचारी प्रतिनिधियों ने आज वित्त मंत्री ओपी चौधरी को उन्हीं का पुराना बजट भाषण याद दिलाया। कर्मचारियों ने साफ कहा कि बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान होने के बावजूद ‘कैशलेस इलाज’ की योजना आज तक फाइलों से बाहर नहीं आ सकी है।
पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा— “बजट सत्र में घोषणा हुई और अब मानसून सत्र आ गया, लेकिन हमारी उम्मीदें अब भी अधर में लटकी हैं। पीड़ित कर्मचारी इलाज के लिए परेशान हैं। मंत्री जी, अब तो इस योजना को धरातल पर उतारिए और बीमार कर्मचारियों को राहत दीजिए।”
बजट सत्र में हुई थी घोषणा, मानसून सत्र तक धरातल ‘शून्य’
गौरतलब है कि पिछले बजट सत्र में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रदेश के लाखों शासकीय सेवकों और पेंशनभोगियों को बड़ी सौगात देते हुए ‘कैशलेस चिकित्सा योजना’ का बड़ा ऐलान किया था। इसके क्रियान्वयन के लिए बकायदा 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भी स्वीकृत की गई थी। लेकिन प्रशासनिक ढर्रे और नीतिगत सुस्ती का आलम यह है कि मानसून सत्र शुरू हो चुका है, पर आज तक इस योजना की गाइडलाइन (SOP) तक तय नहीं हो पाई है।
क्यों फूटा कर्मचारियों का गुस्सा? (मुख्य बिंदु)
बजट के बाद भी जेबें खाली: जब बजट में ₹100 करोड़ सुरक्षित रख दिए गए हैं, तो फिर नियम तय करने में इतनी लेत-लतीफी क्यों? गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ित कर्मचारी आज भी अस्पतालों में कर्ज लेकर इलाज कराने को मजबूर हैं।
फाइलों में कैद रही योजना:
बजट सत्र से लेकर मानसून सत्र के बीच का वक्त गुजर जाने के बाद भी स्वास्थ्य और वित्त विभाग मिलकर यह तय नहीं कर पाए कि कौन से अस्पताल इस पैनल में शामिल होंगे।
कागजी दावों से बढ़ा आक्रोश: पुराने मेडिकल बिल पास कराने के लिए कर्मचारियों को आज भी बाबू और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे मुक्ति दिलाने का वादा सरकार ने किया था।
कर्मचारी संगठनों की चेतावनी: “हम सरकार की घोषणाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन आधी-अधूरी घोषणाओं से कर्मचारियों की जान नहीं बच सकती। अगर इस मानसून सत्र के दौरान सरकार ने कैशलेस इलाज पॉलिसी को लागू करने का ठोस आदेश जारी नहीं किया, तो प्रदेश भर के कर्मचारी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
मानसून सत्र में घिरेगी सरकार!
सत्र के पहले ही दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी को बजट भाषण की प्रति दिखाकर कर्मचारियों ने यह साफ कर दिया है कि वे अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। मानसून सत्र के पहले ही दिन कर्मचारियों के इस मुद्दे ने राजनीतिक पारा गरमा दिया है। विपक्ष भी अगर सजग रहा तो संवेदनशील मामले को लेकर सदन के भीतर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना सकती है।





