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सरकार के रवैये और वादाखिलाफी से नाराज शिक्षक हजारों की संख्या में विधानसभा घेराव के लिए स्कूल छोड़ राजधानी के लिए निकले रास्ते में रोकने की खबर

टीईटी अनिवार्यता, वेतन विसंगति, जबरिया वीएसके एप थोपने, पेशन के लिए पुरानी सेवाओं को जोड़ने,क्रमोन्नति, समय पर महंगाई भत्ता एवं एरियर नहीं मिलने सहित कई मुद्दों पर सरकार के रुख से नाराज हैं शिक्षक

रायपुर / बिलासपुर/ प्रवक्ता कॉम

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15 जुलाई 2026


​रायपुर: अपनी विभिन्न न्यायोचित मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने आज आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रदेश भर से आए हज़ारों की संख्या में शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लेकर रायपुर की सड़कों पर उतरकर विशाल “अधिकार रैली” निकाली और विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। ‘छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक / समग्र शिक्षक फेडरेशन’ के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में शिक्षकों का सैलाब उमड़ राजधानी के लिए निकल पड़ा है।
​मुख्य मांग:

शिक्षक भर्ती से टैट (TET) की अनिवार्यता हो खत्म
​शिक्षकों का सबसे बड़ा और प्रमुख मुद्दा शिक्षक भर्ती परीक्षा में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) या राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने का विरोध है। फेडरेशन के बिलासपुर जिलाध्यक्ष और आंदोलन के प्रमुख अपीलकर्ता सुनील कुमार पाण्डेय ने कहा, “हम वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी अनदेखी कर रही है। टैट की नई अनिवार्यता हम जैसे अनुभवी शिक्षकों के साथ अन्याय है, जिन्होंने पहले ही अपनी योग्यता साबित कर दी है। इसे तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाना चाहिए।”
​अन्य लंबित मांगें भी शामिल हैं

प्रमुख मांगे
​टैट की अनिवार्यता के अलावा, शिक्षकों की अन्य मांगें भी हैं जिन्हें वे लंबे समय से उठा रहे हैं:
​वेतन विसंगति को दूर करना।
​पदोन्नति में स्पष्टता और सरलीकरण।
​पुरानी पेंशन योजना का लाभ।
​अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में ढील।

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विधानसभा सत्र के बीच सरकार पर दबाव
वर्तमान में विधानसभा का सत्र चल रहा है, जिसके चलते शिक्षकों ने इसी समय को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए चुना है। फेडरेशन के नेताओं का कहना है कि वे इस “गहरी निद्रा में सोई सरकार को जगाने” के लिए रायपुर पहुंचे हैं।
​तनावपूर्ण स्थिति
रायपुर के प्रवेश द्वारों और महत्वपूर्ण चौराहों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से की जा रही नाकेबंदी और शिक्षकों को रोके जाने की खबरों के बीच आंदोलनकारियों में भारी रोष देखा जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे किसी भी सूरत में अपनी मांगों को मनवाकर ही दम लेंगे।
क्या है स्थिति?
​शिक्षक सामूहिक अवकाश लेकर बड़ी संख्या में रायपुर की ओर कूच कर चुके हैं। शिक्षकों का यह “हल्ला बोल” आंदोलन ‘छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक / समग्र शिक्षक फेडरेशन’ के बैनर तले आयोजित किया गया है। शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि अब समय केवल इंतज़ार का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की निर्णायक लड़ाई लड़ने का है।

अश्वनी कुर्रे ने जारी की अपील
​आंदोलन के प्रमुख अपीलकर्ताओं में से एक अश्वनी कुर्रे का कहना है कि वे अपनी चट्टानी एकता का परिचय देने के लिए पूरी ताकत से एकजुट हैं और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, उनका संघर्ष जारी रहेगा।


शिक्षकों ने संगठन वाद को किया किनारा –

शिक्षकों के आज के आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में यह साफ साफ दिख रहा है कि उनके हित के लिए क्या जरूरी है इसलिए उन्होंने संगठन वाद को ठोकर मार कर स्कूलों से निकलकर आंदोलन में साथ दिया है। सहायक शिक्षक फेडरेशन के साथ शिक्षक खड़े हैं ।

सामूहिक आवेदन देकर किया कूच

आज के आंदोलन के लिए बिलासपुर,मुंगेली,, कोरबा, जांजगीर, कबीरधाम, बेमेतरा, दुर्ग, कांकेर, सहित सुदूर जिलों से शिक्षक निकल पड़ें हैं । सोशल मीडिया में शिक्षकों ने तस्वीरें साझा कर बाकी शिक्षकों से आंदोलन में शमिल होने की अपील की है।

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