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छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन अटेंडेंस और वेतन आहरण से जुड़ा फर्जी आदेश वायरल: शिक्षकों में भ्रम फैलाने की साजिश

रायपुरए प्रवक्ता.कॉम 27 जुलाई 2026

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​छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों और कार्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के बीच सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर वेतन आहरित करने की बात कही गई है। हालांकि, शुरुआती जांच और तकनीकी विश्लेषण से यह पूरी तरह स्पष्ट होता है कि यह आदेश फर्जी और भ्रामक है, जिसे केवल शिक्षकों के बीच पैनिक (घबराहट) माहौल पैदा करने के उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा है।

फर्जी आदेश की मुख्य बातें (जो वायरल पत्र में दर्ज हैं):

विभाग: लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ (इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर)।

विषय: ऑनलाईन अटेंडेंस अनुसार वेतन आहरित करने के संबंध में।

निर्देश:

जुलाई 2026 के वेतन से केवल उन्हीं कर्मचारियों का वेतन आहरित करने का निर्देश, जिनका रजिस्ट्रेशन हो गया है और जिनकी उपस्थिति ऑनलाइन अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज है, तथा जितने दिन उपस्थिति दर्ज होगी केवल उतने ही दिनों का वेतन मिलेगा।

क्यों फर्जी है यह आदेश? (प्रमुख तकनीकी खामियां):

दिनांक और क्रमांक का अभाव: वायरल पत्र में पत्रांक क्रमांक की जगह और दिनांक के स्थान पर /07/2026 अधूरा छोड़ा गया है, जो किसी भी आधिकारिक शासकीय पत्र में नहीं होता।

डिजिटल हस्ताक्षर या अधिकृत मुहर की कमी: शासकीय पत्रों में तय नियमों के तहत सक्षम अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर या वेरीफाइड सील-पर्ची होती है, जबकि इस वायरल पत्र में इन मानको का अभाव साफ देखा जा सकता है।

हड़बड़ी में तैयार किया गया ड्राफ्ट: इस तरह के अधूरे दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर वायरल करने का मुख्य मकसद केवल कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच असमंजस और डर का माहौल खड़ा करना है।

प्रशासनिक अपील व सलाह

​संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों ने ऐसे किसी भी आधिकारिक आदेश की पुष्टि नहीं की है। शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील है कि वे इस तरह के असत्यापित और फर्जी वायरल पत्रों पर ध्यान न दें तथा किसी भी प्रकार की भ्रमित स्थिति में आधिकारिक पुष्टि का ही इंतजार करें

डीईओ और बीईओ ग्रुप्स में आदेशों का साझा होना: जब इस तरह के आदेश सीधे जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकास खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) के अधिकृत या अनौपचारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में शेयर होते हैं, तो शिक्षकों में भ्रम की स्थिति और अधिक गहरी हो जाती है कि इसे सही माना जाए या फर्जी।

ऑनलाइन अटेंडेंस की तकनीकी और व्यावहारिक अड़चनें:

शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों का यह तर्क है कि बिना पर्याप्त संसाधनों, नेटवर्क की समस्याओं और बिना किसी ठोस व्यवस्था के ऑनलाइन अटेंडेंस को वेतन से जोड़ना व्यावहारिक नहीं है। इससे पहले भी विभाग द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने और समय सीमा तय करने को लेकर निर्देश आ चुके हैं, जिसके कारण जमीनी स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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