VSK ऐप के जरिए ऑनलाइन उपस्थिति और वेतन कटौती का विरोध तेज, छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ ने जताया आक्रोश

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 29 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ में VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता और इसके आधार पर शिक्षकों के वेतन रोके जाने के निर्देश को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ ने इस निर्णय को शिक्षक विरोधी, अन्यायपूर्ण और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया है।
संघ के प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा इस मामले में उठाए गए मुख्य बिंदु
विष्णु प्रसाद साहू (संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष)
समर्पण और कठिनाइयां:
प्रदेश के शिक्षक पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में तकनीकी दिक्कतें, नेटवर्क की समस्या और सर्वर डाउन रहने के कारण ऐप में ऑनलाइन उपस्थिति और अवकाश आवेदन दर्ज करने में भारी व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।
वेतन कटौती का विरोध:
विद्यालय में उपस्थिति होने के बावजूद यदि ऐप या सर्वर की तकनीकी खामी के कारण हाजिरी दर्ज नहीं होती है, तो उसके आधार पर शिक्षकों का वेतन काटना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
प्रमुख मांग: संघ ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) से मांग की है कि वेतन कटौती संबंधी निर्देश पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और पारंपरिक उपस्थिति पंजी के आधार पर ही वेतन निर्धारण किया जाए।
खोमनलाल साहू (प्रदेश संचालक)
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएं: राज्य के कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की गंभीर समस्या है।
गलत लोकेशन एरर:
कई बार शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचकर अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य करते हैं, लेकिन सर्वर या नेटवर्क की समस्या के कारण ऐप में विद्यालय से दूरी बता दी जाती है, जिससे समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।
प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध:
ऐसी तकनीकी बाधाओं के लिए शिक्षकों को दोषी मानकर उन्हें अनुपस्थित ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
विवेक धुर्वे (प्रदेश सचिव)
तकनीकी समाधान की मांग:
जब तक VSK ऐप पूरी तरह से त्रुटिमुक्त और सुचारu रूप से कार्य नहीं करने लगता, तब तक इसे वेतन भुगतान का एकमात्र आधार न बनाया जाए।
बुनियादी सुविधाएं:
संघ ने मांग की है कि ऐप को अनिवार्य करने से पहले सभी विद्यालयों में सुचारu इंटरनेट और नेटवर्क की पुख्ता सुविधा सुनिश्चित की जानी चाहिए, तथा पूर्व की तरह भौतिक उपस्थिति पंजी को ही वेतन का आधार बनाया जाना चाहिए।




