कबीरधाम में पहली बार गूंजेगी ट्रेन की सीटी, कटघोरा-कवर्धा-खैरागढ़ बनेगी क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’
लगभग 295 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉडगेज विद्युतीकृत रेल लाइन छत्तीसगढ़ के कई जिलों—कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम और राजनांदगांव को आपस में जोड़ेगी।

डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन को मिली औपचारिक स्वीकृति
दिल्ली/रायपुर/कबीरधाम
प्रवक्ता.कॉम 30 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ में रेल बुनियादी ढांचे को एक बड़ा विस्तार देते हुए बहुप्रतीक्षित डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है। इसके साथ ही बस्तर क्षेत्र में दो नई रेल लाइनों के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।
सी एम विष्णु देव साय और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी साथ रहे
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने राजनांदगांव सांसद श्री संतोष पाण्डेय के साथ रेल मंत्रालय में केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से औपचारिक मुलाकात की।
इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए बेहद अहम डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन और बस्तर क्षेत्र में दो नई रेल लाइनों की स्वीकृति मिलने पर रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया।
इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए बेहद अहम डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन और बस्तर क्षेत्र में दो नई रेल लाइनों की स्वीकृति मिलने पर रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया।
सांसद के प्रयास:
राजनांदगांव सांसद संतोष पाण्डेय द्वारा इस महत्वपूर्ण मांग को लगातार लोकसभा में मजबूती से उठाया गया था, जिसके बाद इस परियोजना को हरी झंडी मिली
आभार व्यक्त

इस सौगात के मिलने पर क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और सांसद श्री संतोष पाण्डेय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रेल लाइन
छत्तीसगढ़ के रेल मानचित्र पर एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन परियोजना के मूर्त रूप लेने से कबीरधाम (कवर्धा), खैरागढ़ और मुंगेली जैसे जिले पहली बार सीधे तौर पर देश के रेलवे नेटवर्क से जुड़ेंगे। यह महत्वाकांक्षी रेल कॉरिडोर इन क्षेत्रों के विकास की नई धुरी और सचमुच ‘लाइफलाइन’ साबित होगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
लंबाई और विस्तार:
लगभग 295 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉडगेज विद्युतीकृत रेल लाइन छत्तीसगढ़ के कई जिलों—कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम और राजनांदगांव को आपस में जोड़ेगी।
स्टेशनों का नेटवर्क:
इस पूरे मार्ग पर लगभग 27 स्टेशन बनाए जाने प्रस्तावित हैं, जिनमें डोंगरगढ़, खैरागढ़, छुईखदान, गंडई, कवर्धा, मुंगेली, तखतपुर, रतनपुर और कटघोरा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
कबीरधाम को सबसे बड़ा लाभ:
इस परियोजना के तहत अकेले कबीरधाम जिले के दर्जनों गांवों से होकर रेल पटरी गुजरेगी, जिससे जिले के लोगों का बरसों पुराना ट्रेन देखने और उसमें सफर करने का सपना पूरा होगा।
क्षेत्र के विकास पर प्रभाव
व्यापार और सुगम आवागमन:
कवर्धा, खैरागढ़ और मुंगेली के लोगों को अब राजधानी रायपुर या बिलासपुर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस रूट के शुरू होने से यात्रियों को सीधे ट्रेन की सुविधा मिलेगी, जिससे व्यापार, शिक्षा और चिकित्सा के लिए आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा।
औद्योगिक एवं आर्थिक प्रगति:
यह रेल लाइन केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कोयला और अन्य खनिज संसाधनों के परिवहन (कोयला कॉरिडोर) के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे छत्तीसगढ़ के खनिज बहुल क्षेत्रों से लेकर दूसरे राज्यों तक माल ढुलाई सुगम होगी।
रोजगार के नए अवसर:
ट्रेन संचालन, स्टेशनों के विकास और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने से क्षेत्रीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
इस रेल परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल कबीरधाम और आसपास के अछूते इलाकों की तस्वीर बदलेगी, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक कायाकल्प की एक मजबूत नींव बनेगी।





